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कर्मचारी को अपहरण कर मांगे 6 लाख रुपये, पुलिस ने तीन घंटे के अंदर आरोपितों को किया गिरफ्तार

Fri, 28 Feb 2020 07:07 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर

सार

  • बृहस्पतिवार की शाम छह बजे घर से सूदखोरों ने उठाया था, अपहरण पर दौड़ पड़ी पुलिस
  • रामगढ़ताल पुलिस ने पीड़िता के सहयोग से अपहरणकर्ता को दबोच, सफाई कर्मी को मुक्त कराया
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पुलिस के गिरफ्त में आरोपित। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रामगढ़लाल इलाके के पथरा से सफाईकर्मी उधम मिश्रा उर्फ उधारी के अपहरण से हड़कंप मच गया। बृहस्पतिवार की शाम वायरलेस पर सूचना आते ही पुलिस हरकत में आ गई। रामगढ़ताल पुलिस वादी की मदद से जांच में जुट गई और तीन घंटे के भीतर अपहरण करने के आरोपित पिता पुत्र को गिरफ्तार कर उनके चंगुल से सफाई कर्मी को मुक्त कराया। पुलिस ने आरोपितों पर अपहरण और सूदखोरी अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज कर शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया।
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आरोपितों की पहचान बांसगांव के अनंतपुरवा उर्फ डड़वा निवासी दयाशंकर सिंह और उनके पुत्र नीरज सिंह के रूप में हुई। सीओ कैंट सुमित शुक्ला ने पकड़े गए आरोपितों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सफाई कर्मी उधम मिश्रा ने अपने ही गांव के दयाशंकर से सूद पर तीन लाख रुपये करीब तीन साल पहले लिए थे। सफाई कर्मी ने तीन लाख के एवज में पांच लाख रुपये वापस कर दिए थे मगर सूदखोर छह लाख रुपये और मांग रहे थे।

रुपये ना देने पर गुंडई पर उतरे सूदखोरों ने शहर के बड़गो स्थित उधम मिश्रा के मकान से सरेशाम अपहरण कर लिया। उधम की पत्नी विजय लक्ष्मी ने पुलिस कंट्रोल में सूचना देने के साथ ही रामगढ़ताल थाने पर सूचना दी। इसी बीच अपहरणकर्ताओं ने फोन कर उधम की पत्नी विजयलक्ष्मी को छह लाख रुपये और ब्लैंक चेक लेेकर आने की धमकी दी। कहा कि, चेक लेेने के बाद वे उनके पति को मुक्त कर देंगे, नहीं तो मार डालेंगे।
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उधर, पुलिस विजयलक्ष्मी से लगातार अपहरणकर्ताओं से बात करने को कहा और एक योजना के तहत आरोपितों को परसिया गांव के पास बुलाया गया। इंस्पेक्टर रामगढ़ताल राणा देवेंद्र प्रताप सिंह, चौकी इंचार्ज आजाद चौक मनीष यादव, चौकी इंचार्ज आजाद नगर सूरज सिंह हमराहियों के साथ वहां पर पहुंच गए। रात में दस बजे के करीब आरोपित के आते ही पुलिस ने दबोच लिया और फिर उसके घर से सफाई कर्मी को मुक्त कराया।

बिना लाइसेंस के करता था सूद का कारोबार

सीओ ने बताया कि दयाशंकर बिना लाइसेंस के ही सूदखोरी का काम करता है। जो गांव के आसपास के गरीब लोगों को सूद पर रुपये देता है। उधम को उसने तीन वर्ष पूर्व छह प्रतिशत चक्रवृद्घि ब्याज पर 3 लाख रुपये दिया था। उधम ने उसको 5 लाख रुपये लौटा चुका था। फिर भी दयाशंकर 6 लाख रुपये और मांग रहा था। रुपये न देने पर वह अपने बेटे के साथ मिलकर उधम मिश्रा का अपहरण कर लिया और बांसगांव स्थित अपने घर लेते गया।

इस तरह पुलिस ने पकड़ा
अपहरण की सूचना के बाद चौकी इंचार्ज मनीष यादव ने पहले उधम की पत्नी से अपहरणकर्ताओं से फोन पर बात कराई। आरोपित दयाशंकर ने छह लाख रुपये और चेक लेकर बांसगांव स्थित अपने घर आने की बात कही। जिसके बाद पत्नी ने बोला की मैं आ रही हुं। इसके बाद पत्नी को साथ लेकर पुलिस प्राइवेट गाड़ी से सादे वर्दी में बांसगांव के लिए निकल गई।

बांसगांव पहुंचकर पत्नी ने आरोपित को फिर फोन किया और रात होने के कारण ऑटो न मिलने की बात कही। जिसके बाद आरोपित ने उसे बोला कि तुम परसिया स्थित मंदिर के पास रूको मैं तुम्हारे पति को लेकर वहीं आता हुं। मंदिर के पास पत्नी को खड़ा कर पुलिस वहीं आसपास छिप गई। जैसे ही दयाशंकर अपने बेटे नीरज के साथ उधम को लेकर आया पुलिस ने दोनाें को दबोच लिया।
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सूदखोरी का फैला हुआ है जाल

जिले में सूदखोरी का काम बहुत ही जोरों पर होता है। गोरखनाथ, कैंट, खोराबार सहित कई इलाकों में लोग अवैध तरीके से बिना लाइसेंस के ऊंचे ब्याज दर पर रकम देते हैं। रुपये वापस लेने के लिए दबंगई और गुंडई भी करते हैं। रेलवे सहित कई सरकारी विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सूदखोरी का शिकार है। उनकी आधी कमाई सूद चुकाने में चली जाती है। सूदखोरी का लाइसेंस यहां कुछ गिने चुने लोगों के पास ही है। पर गली गली में लोग सूदखोरी का कारोबार करते हैं। कई बार इस चक्कर में लोग आत्महत्या भी कर चुके हैं। तो कई बार बड़ी अपहरण और फायरिंग जैसी घटनाएं भी हो चुकी है।
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