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मदद के नाम पर खाली कर देते थे लोगों का बैंक अकाउंट, वारदात के बाद प्रयागराज में करते थे पार्टी

Tue, 11 Feb 2020 09:33 PM IST
हरीशचंद सिंह डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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एटीएम से रुपये निकालने गए लोगों की मदद के बहाने कार्ड बदलकर जालसाजी करने वाले गिरोह के चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बेलीपार इलाके में एटीएम कार्ड बदलने के चक्कर में थे कि इसी दौरान पुलिस ने पकड़ लिया। पूछताछ में बताया कि घूमने फिरने के में रुपयों को खर्च करते थे। आरोपितों के पास से तमंचा, कारतूस और कई बैंक का अलग-अलग नाम से एटीएम कार्ड, बाइक और नकदी बरामद हुई।

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आरोपितों की पहचान प्रयागराज के हंडिया, बिगहियां निवासी विनय शुक्ला उर्फ  डब्लू, अंशुमान सिंह उर्फ  सौरभ सिंह, बेलीपार के भसमा निवासी हरिकेश निषाद और वीरू कुमार के रूप में हुई। पुलिस लाइंस में एसपी दक्षिणी विपुल कुमार श्रीवास्तव ने प्रेस कांफ्रेंस कर पकड़े गए बदमाशों के बारे में जानकारी दी।

एसपी ने बताया कि बेलीपार पुलिस को सूचना मिली कि एटीएम कार्ड बदलकर रुपये उड़ाने वाले गैंग के सदस्य शहर से लौटे है। इस सूचना पुलिस ने छानबीन की तो मलाव के पास एटीएम में मौजूद लोगों को मदद का झांसा देते हुए रुपये निकालने की कोशिश में जुटे हैं। पुलिस ने चेकिंग के दौरान उनको पकड़ लिया। उनके पास से अलग-अलग बैंक के एटीएम कार्ड बरामद हुए। जिसके बाद पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो जुल्म कबूल कर लिया है।

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सूरत में हुई मुलाकात के बाद गोरखपुर में करने लगे वारदात

पुलिस की छानबीन में सामने आया कि बेलीपारए भसमा निवासी हरिकेश का भाई सूरत में रहकर कमाता है। वहां पर करीब पांच माह पूर्व उसकी मुलाकात अंशुमान सिंह से हुई। सूरत में कमाई का नया जरिया मिलने पर सभी वापस लौट आए। यहां पर बैंक ग्राहकों के एटीएम कार्ड बदलकर रुपये निकालने गए।

एक-एक करके गैंग के सदस्य एटीएम में इंट्री करते थे। फिर  किसी न किसी बहाने से ग्राहक का एटीएम कार्ड बदल देते थे। उसका रुपया निकालने की बात कहकर पासवर्ड भी जान लेते थे। करीब तीन माह से शहर में एक्टिव गैंग के सदस्यों ने 20 से अधिक वारदातों को अंजाम दिया, लेकिन कम रकम निकाले जाने की वजह से पुलिस ने एफआईआर नहीं दर्ज किया। गैंग का मास्टर माइंड प्रयागराज का अंशुमान सिंह है।

वारदात के बाद प्रयागराज लौट जाते थे
आरोपित वारदात करने के बाद प्रयागराज चले जाते थे। फिर रुपये खत्म होने पर गोरखपुर में आकर वारदात करते थे। कई घटनाओं में आरोपित शामिल थे।
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