विश्व के सभी खाद कारखानों में सबसे ऊंचा है यहां का प्रिलिंग टॉवर
प्रबंध निदेशक ने बताया कि प्लांट में बना प्रिलिंग टॉवर विश्व भर के खाद कारखानों की तुलना में सबसे ज्यादा ऊंचा है। इसकी ऊंचाई 149.5 मीटर और व्यास 28 से 29 मीटर है। पाइप लाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस और नाइट्रोजन के रिएक्शन से अमोनिया का लिक्विड तैयार किया जाएगा। अमोनिया के इस लिक्विड को प्रिलिंग टॉवर की 117 मीटर ऊंचाई से गिराया जाएगा।
इसके लिए ऑटोमेटिक सिस्टम तैयार किया गया है। अमोनिया लिक्विड और हवा में मौजूद नाइट्रोजन के रिएक्शन से यूरिया छोटे-छोटे दानों के रूम में प्रिलिंग टॉवर के बेसमेंट में बने कई होल के रास्ते बाहर आएगा। इसके बाद यूरिया के दानों पर नीम का लेप चढ़ाने के बाद उसे पैक किया जाएगा।
गोरखपुर के विकास में सहभागिता निभा रहा एचयूआरएल
प्रबंध निदेशक एके गुप्ता ने बताया कि एचयूआरएल गोरखपुर के नागरिकों के लिए भी बहुत कुछ कर रहा है। कोरोना काल में हरनही व कैंपियरगंज में दो ऑक्सीजन प्लांट लगवाए गए। सामुदायिक भवन, 24 करोड़ की लागत से बच्चों के लिए पीआइसीयू, 12 स्कूलों में शुद्ध पेयजल, सोनबरसा में 13 करोड़ की लागत से मॉडल गांव, रामगढ़ताल का सुंदरीकरण कर मुंबई के मरीन ड्राइव की तरह बनाने समेत अन्य कार्य कराए जा रहे हैं। आने वाले आठ से नौ महीनों में सभी कार्य पूरे हो जाएंगे।
265 रुपये होगी 45 किग्रा यूरिया की कीमत
कारखाने में 45-45 किलोग्राम वजन की नीम कोटेड यूरिया की बोरियां तैयार की जाएंगी। इसकी एमआरपी 266.50 रुपये होगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खाद की कीमत से अधिक मूल्य कोई भी न वसूल सके। बिक्री की लगातार मॉनीटरिंग भी की जाएगी।
जुलाई 2016 में पड़ी थी कारखाने की नींव, 46 महीने में हुआ तैयार
प्रबंध निदेशक ने बताया कि 22 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाद कारखाने का शिलान्यास किया था। खाद कारखाना बनाने के लिए 38 महीने का समय मिला था। कोरोना संक्रमण की दो लहर के कारण थोड़ी देर हुई। इसके बाद भी 46 महीने में काम पूरा करा लिया गया। खाद कारखाना में लगभग 13 लाख टन नीम कोटेड यूरिया का हर साल उत्पादन होगा।
उन्होंने बताया कि खाद कारखाना में 30 फीसद से ज्यादा पूर्वांचल के युवाओं को नौकरी दी गई है। इनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है। कहा कि यही लड़कियां खाद कारखाना चलाएंगी। नाइट शिफ्ट में भी लड़कियां काम करेंगी।