गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने की घोषणा के बाद जिस तरह विपक्षी दलों ने विरोध को हवा दी थी, गीता प्रेस के कार्यक्रम में शामिल होकर पीएम मोदी ने सियासी बयार को उलट दिया। विरोधियों को उन्हीं की पिच पर घेरकर संदेश दिया कि पार्टी अपने सांस्कृतिक एजेंडे पर मजबूती के साथ खड़ी है।
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प्रधानमंत्री ने देश में वंदे भारत एक्सप्रेस के शुभारंभ अवसर को विकास उत्सव में बदलकर भी विपक्ष को चुनौती दी है। गोरखपुर से दो वंदे भारत ट्रेन को रवाना कर उन्होंने संदेश दिया कि आगामी लोकसभा चुनाव में विकास की चुनावी पिच पर भी सबको खेलना होगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का मजबूत आधार भी उनके पास है।
कई बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरक्षनगरी प्रदेश की सियासत का केंद्र बन गई है। पूर्वांचल की लोकसभा सीटों पर योगी का व्यापक जनाधार है। ऐसे में प्रधानमंत्री ने चुनावी अभियान की अनौपचारिक शुरुआत कर पूर्वांचल के मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। ऐसा इसलिए भी है कि पूर्वांचल में पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को उस तरह की आशातीत सफलता नहीं मिल पाई थी। तो पार्टी इस बार कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती।