इससे आगे बढ़ने पर करीब तीन सौ मीटर तक मॉडल के तौर पर सुंदरीकरण का काम कराया जा चुका है, जो खूबसूरती का एहसास कर रहा है, लेकिन जैसे ही और आगे बढि़ए, बांध पर तनिक भी काम नहीं हुआ है। मिट्टी डालकर छोड़ दी गई है। बरहुआं से आगे बढ़ने पर स्थिति और ज्यादा खराब है। बांध पर उगी बड़ी-बड़ी झाड़ियां और गोबर के ढेर बदसूरती बयां कर रहे हैं।
खूबसूरती के बजाए मिलीं दुश्वारियां
परियोजना का मकसद लखनऊ की तरफ से आने वाले लोगों को शहर की खूबसूरती का अहसास कराना है। मियाद बीतने को है अभी तक खूबसूरती तो नहीं दिखाई पड़ी। अलबत्ता इस रोड से आने-जाने वाले लोगों और बंधे के सामने रह रही बड़ी आबादी की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। कहीं सड़क पर मिट्टी पड़ी है, तो कहीं बांध पर। बारिश में सड़क पर कीचड़ फैल जाता है, तो गर्मी के मौसम में हवा और गाड़ियां चलने से पूरे क्षेत्र में धूल का गुबार उड़ रहा है। ठेकेदार मिट्टी पर पानी भी नहीं डलवाता है, ताकि धूल न उड़े।
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तीन साल से चह रहा काम, 50 फीसदी हुआ, 13 दिन में शेष कार्य कैसे होगा?
नौसड़ से कालेसर के बीच साढ़े छह किलोमीटर तक बंधे के सुंदरीकरण का कार्य करीब तीन साल से चल रहा है। इसे मार्च 2023 में पूरा होना है, लेकिन इसका करीब 50 फीसदी ही कार्य हो पाया है, जबकि तय समय में केवल 13 दिन ही बचे हैं। लोग आशंका जता रहे हैं कि तय अवधि फिर बढ़ाई जाएगी। इससे लोगों की परेशानियां और बढ़ जाएंगी।
फैक्ट फाइल
सुंदरीकरण : साढ़े छह किमी
लागत : 9:50 करोड़ रुपये
लक्ष्य : मार्च 2023
कार्य की प्रगति : करीब 50 फीसदी
- बांध पर आकर्षक पत्थर लगाने के साथ रंग-रोगन
- छायादार और सजावटी पौधे लगाए जाएंगे
- लोगों के बैठने के लिए बेंच लगाई जाएगी, लाइटिंग भी होगी
- बांध पर मिट्टी डालकर घास लगाई जाएगी
- सड़क की ओर फुटपाथ बनाया जाएगा
बोले क्षेत्र के लोग
किसी परियोजना का डीपीआर तैयार होता है उसमें यह शर्त होती है कि चारों तरफ से ढककर काम कराया जाए। मिट्टी का काम है तो उसपर समय-समय पर पानी डालने का प्रावधान होता है। इसका खर्च परियोजना में जुड़ा रहता है। मगर जिम्मेदारों को आमजन को होने वाली परेशानियों से कोई फर्क ही नहीं पड़ता
।- गिरीश तिवारी
सरकार विभिन्न परियोजनाओं पर सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इन परियोजनाओं को जमीन पर उतारने वाले गंभीरता से काम नहीं कर रहे। थोड़ी सी लापरवाही की वजह से सरकार की किरकिरी होती है। सड़क पर मिट्टी और ईंट के ढेर लगा देने, धूल उड़ने से लोगों को दिक्कतें हो रही हैं।
- संतोष पांडेय
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पूरे दिन धूल के गुबार उड़ते हैं। घर के बाहर अगर बैठ जाएं तो धूल से पट जाएंगे। अब तक काम खत्म होने की बात कही गई थी, मगर मौके पर 40 फीसदी भी काम नहीं दिख रहा। बड़गहन के सामने तो कोई काम ही नहीं हुआ है।
-सुरेश यादव
जगह-जगह लगे मिट्टी और ईंट के ढेर यदि जल्द हटाए नहीं गए तो किसी बड़े हादसे की वजह बन जाएंगे। थोड़ी सी चूक हुई तो दुर्घटना तय है। वाहन को ओवरटेक करते समय खतरा सबसे अधिक है। पूरे रास्ते पर उड़ रही धूल से स्थानीय लोगों के अलावा बाइक से चलने वालों को भी परेशानी हो रही है।
- मुन्ना जायसवाल
बीच सड़क पर ईट- गिट्टी से दो व्यापारी पुत्रों की जा चुकी है जान
बंधे के सुंदरीकरण के कार्य में की जा रही ठेकेदार और कार्यदायी संस्था की लापरवाही से पिछले साल दो व्यापारी पुत्रों की जान भी जा चुकी है जबकि एक गंभीर रुप से घायल हो गया था। गत नौ जुलाई 2022 की देर रात यह हादसा हुआ था। कालेसर से नौसड़ के बीच बरहुआं यादव टोला के पास सड़क पर बंधे के सुंदरीकरण के लिए रखे गए ईंट के टुकड़ों और गिट्टी के ढेर से टकराकर कार अनियंत्रित होकर पलट गई थी।
हादसे में मार्बल व्यापारी प्रमोद अग्रवाल के बेटे अंकित अग्रवाल(34 वर्ष) और रमा मेडिकल स्टोर के संचालक महेश अग्रवाल के बेटे अभिषेक अग्रवाल (35) की मौत हो गई थी। जिस समय घटना हुई थी, निर्माण कार्य के पास सड़क पर कोई संकेतक या अवरोधक नहीं रखा गया था। चालक सड़क पर रखे गिट्टी व ईंट के टुकड़ों के ढेर को नहीं देख पाया और उससे टकरा गया।
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जानकारी के मुताबिक, साहबगंज निवासी अभिषेक बजाज और बेतियाहाता निवासी अंकित अग्रवाल व अभिषेक अग्रवाल गीडा स्थित एक रेस्त्रां में दावत करने गए थे। देर रात तीनों दोस्त कार से शहर स्थित आवास लौट रहे थे। बरहुआं गांव के यादव टोला के पास पहुंचे थे कि सड़क के किनारे बंधे के सुंदरीकरण के लिए रखे ईंट के टुकड़ों व गिट्टी के ढेर पर कार का पहिया चढ़ गया था। इससे कार अनियंत्रित होकर पलट गई।
तेज धमाके की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना देकर बुलाया था। पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से सभी को जिला अस्पताल पहुंचाया। मगर, वहां डॉक्टरों ने युवा व्यापारी अंकित अग्रवाल और अभिषेक अग्रवाल को मृत घोषित कर दिया। दोनों मृत व्यापारी पुत्रों की शादियां हो चुकी थी और दोनों के छोटे बच्चे भी थे। इस घटना के बाद भी जिम्मेदार जागे नहीं और अभी भी आधी सड़क पर मिट्टी और गिट्टी का ढेर रखकर दूसरी घटना का इंतजार कर रहे हैं।