घर बनवाने या निवेश के लिए जमीन खरीदने की योजना बनाने वालों को नई महायोजना-2031 के लागू होने का इंतजार है। इस कारण लोगों ने जमीन की रजिष्ट्री कराना विलंबित कर दिया है। इसका असर सदर तहसील के साथ चौरीचौरा व सहजनवां तहसील के उप निबंधन कार्यालय की आय पर पड़ रहा है। सर्वाधिक असर सदर तहसील क्षेत्र के दोनों उप निबंधन कार्यालयों पर पड़ रहा है। इन दफ्तरों में रजिस्ट्री की संख्या में 25 फीसदी तक कम आ गई है।
दरअसल, लोग शहर से सटे इलाकों एवं गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के विस्तारित क्षेत्र में भू-उपयोग के संबंध में सशंकित हैं। मसलन, महायोजना में ऐसे कई क्षेत्रों का भू-उपयोग कृषि या हरित क्षेत्र कर दिया गया है, जहां बड़ी संख्या में आबादी रहती है। वहीं, कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जहां कई माह तक पानी भरा रहता है। बावजूद इसके वहां का भू-उपयोग आवासीय किया गया है। जैसे कि बनसप्ती में पांच हजार से अधिक की आबादी है, लेकिन इस क्षेत्र को हरित घोषित किया गया है।
वहीं, काफी निचला इलाका होने की वजह से ताल कंदला, जहां बारिश का मौसम समाप्त होने के करीब तीन माह बाद तक जलभराव रहता, का भू-उपयोग बदलकर आवासीय कर दिया गया है। ऐसे कई परिवर्तन के संबंध में बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल की गई हैं। अब लोगों को डर लग रहा है कि कहीं जमीन और मकान में निवेश के बाद उस क्षेत्र का भू-उपयोग न बदल जाए। इसीलिए लोग महायोजना के अंतिम प्रारूप का इंतजार कर रहे हैं। कई लोगों ने तो जमीन के लिए एडवांस दे दिया है, लेकिन रजिस्ट्री नहीं करा रहे हैं।
बता दें कि महायोजना का प्रारूप तैयार होने के बाद जीडीए ने आपत्ति दाखिल करने के लिए करीब डेढ़ महीने का समय दिया था। इस दौरान 11,000 से अधिक लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। अब इनके निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।