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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित लोगों की गुहार: साहब! रजिस्ट्री कराई, नक्शा पास कराया, सभी कर देते हैं, नियमित कर दें हमारे मकान

Sun, 02 Jan 2022 04:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

आवास विकास की जमीन से कब्जा हटाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित लोगों में खलबली मची है। इन लोगों ने मुख्यमंत्री, कमिश्नर और डीएम से गुहार लगाते हुए कहा कि शुल्क लेकर परिषद भूमि आवंटन कर दे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आवास विकास परिषद बनाम नूर मोहम्मद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बेतियाहाता दक्षिणी के कई प्रभावित लोगों में खलबली मच गई हैं। सभी को आवास विकास परिषद की तरफ से नोटिस जारी किया जा चुका है। 25 दिसंबर 2021 तक निर्माण खाली करना था मगर संबंधित लोगों ने मुख्यमंत्री, कमिश्नर और डीएम को पत्र लिखकर गुहार लगाई है।

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उनका कहना है कि उन्होंने नियम के तहत जमीन रजिस्ट्री कराई, खारिज दाखिल कराया, जीडीए से नक्शा भी पास है। बिजली का बिल, गृह और जल कर भी देते हैं। ऐसे में आवास विकास परिषद, नियमों के तहत शुल्क लेकर उन्हें भूमि आवंटित कर दे। इस मामले में डीएम विजय किरन आनंद की पहल पर एडीएम सिटी विनीत सिंह, आवास विकास परिषद के अधिकारियों और कब्जेदारों की मौजूदगी में शनिवार को डीएम कार्यालय में बैठक हुई।

कब्जेदार राजेश छापड़िया, राजेश सिंह, राजकुमार खेतान, डॉ सत्यानंद केडिया, अरविंद कनोडिया आदि प्रभावित लोगों सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को मानते हुए गुहार लगाई कि नियम के तहत परिषद संभव शुल्क लेकर हमें नियमित कर दे। मगर स्थानीय स्तर पर कोई निर्णय नहीं हो सका। पूरे प्रकरण को लेकर अब लखनऊ में 7 जनवरी को प्रस्तावित आवास विकास परिषद बोर्ड की बैठक में विचार विमर्श होगा।  
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बता दें, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद आवास विकास परिषद ने बेतियाहाता दक्षिणी में अपनी करीब 1.78 एकड़ जमीन से कब्जा हटाने की कवायद शुरू कर दी है। परिषद ने नोटिस देकर 25 दिसंबर तक अपना कच्चा या पक्का निर्माण हटाने को कहा था। 30 दिसंबर को परिषद के तरफ से बुलडोजर भी पहुंचा था, मगर कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के कहने और जमीन पर निर्माण कर रहने वालों के विरोध की वजह से  कार्रवाई नहीं हो सकी। परिषद के अधिशासी अभियंता अभिषेक वर्मा के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद बेतियाहाता दक्षिणी योजना में खुले क्षेत्र, पार्क, सड़क एवं आवासीय भूखंडों पर किए गए अतिक्रमण को हटाया जाना है। भूमि खाली होने के बाद वहां नए आवास बनाए जाने की योजना है।
 
आवास विकास परिषद के अधिक्षण अभियंता जेके कौशल ने बताया कि मामले को लेकर एडीएम की मौजूदगी में बैठक हुई है। कब्जेदारों की तरफ से अपना पक्ष रखा गया है। आवास विकास के ले-आऊट में आवासीय भू-खंड एरिया में काबिज लोगों के बारे में निर्णय लेने की बात हुई है। संभव है सात जनवरी को परिषद की बैठक में प्रकरण को रखा जाए। लेकिन जो लोग सड़क, पार्क या अन्य भू-प्रयोग वाले एरिया में काबिज हैं, उन्हें हटाया जाएगा।

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