संतकबीरनगर के परियोजना निदेशक निलंबित, सीडीओ से जवाब तलब
- सांसद निधि में कमीशन के तौर पर हिस्सा मांगने के वायरल ऑडियो का संज्ञान लेकर शासन ने की कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी
लखनऊ/संतकबीरनगर। सांसद निधि में कमीशन के तौर पर हिस्सा मांग रहे संतकबीरनगर के परियोजना निदेशक (डीआरडीए) सुरेंद्र कुमार गुप्ता के वायरल ऑडियो का शासन ने संज्ञान लिया है। मंगलवार को लखनऊ में आयोजित परियोजना निदेशकों की बैठक में भी गुप्ता के खिलाफ गंभीर शिकायतें सामने आईं। इस पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बैठक में ही उन्हें निलंबित करने और विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए। उधर, शासन ने सीडीओ अतुल मिश्र को सुबह ही लखनऊ बुला लिया। वायरल ऑडियो में उनका भी नाम सामने आने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। पूरे दिन इस प्रकरण की चर्चा होती रही।
सांसद निधि से कराए गए विकास कार्यों में लिए गए कमीशन के बंटवारे को लेकर परियोजना निदेशक सुरेंद्र कुमार गुप्त और नाथनगर ब्लॉक के लेखाकार तरुण कुमार शांडिल्य के बीच हुई बातचीत का ऑडियो सोमवार को वायरल हुआ था। ऑडियो में परियोजना निदेशक सीडीओ को हिस्सा दिए जाने और खुद को छोड़ दिए जाने पर लेखाकार से नाराजगी जताते हुए सुने गए।
इधर, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सांसद निधि, विधायक निधि और प्रधानमंत्री आवास योजना के संबंध में चर्चा के लिए लखनऊ में प्रदेश के सभी जिलों के डीआरडीए के परियोजना निदेशकों की बैठक बुलाई थी। इसमें संतकबीरनगर से परियोजना निदेशक को शामिल होना था, लेकिन उनके बीमार होने की वजह से उपायुक्त (एनआरएलएम) जीशाना रिजवी को भेजा गया था। बैठक में उप मुख्यमंत्री ने वायरल ऑडियो का मुद्दा उठाया और परियोजना निदेशक सुरेंद्र कुमार गुप्त को निलंबित करने का निर्देश प्रमुख सचिव व आयुक्त ग्राम्य विकास को दिया। बैठक में शामिल उपायुक्त (एनआरएलएम) ने इसकी पुष्टि की।
डीएम ने 24 घंटे में मांगी थी रिपोर्ट, अभी तक जांच शुरू ही नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सांसद निधि में कमीशन के तौर पर हिस्सा मांग रहे परियोजना निदेशक (डीआरडीए) सुरेंद्र कुमार गुप्ता के वायरल ऑडियो का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह ने सोमवार को जांच के निर्देश दिए थे। एडीएम और सीडीओ की कमेटी बनाकर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन मंगलवार को रात आठ बजे तक 24 घंटे बीतने के बाद भी इस प्रकरण की जांच शुरू नहीं हो पाई।
दरअसल एडीएम मनोज कमार सिंह एक दिन पहले निकाय चुनाव के प्रशिक्षण के लिए लखनऊ गए थे, जबकि सीडीओ को शासन ने ऑडियो प्रकरण में लखनऊ तलब कर लिया। जांच अधिकारियों के जिले में न रहने की वजह से जांच शुरू नहीं हो सकी। सवाल ये भी उठ रहा है कि वायरल ऑडियो में सीडीओ का नाम आने के बाद उन्हें जांच टीम में क्यों शामिल किया गया? डीएम का कहना है कि एडीएम वापस आ गए हैं। सीडीओ पहले कमिश्नर की बैठक में व्यस्त रहे, फिर लखनऊ जाना पड़ा। इसलिए जांच शुरू नहीं हो सकी। इधर, कमिश्नर योगेश्वर राम मिश्रा ने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। यह गंभीर मामला है। डीएम से दो दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। कमीशनखोरी के वायरल ऑडियो प्रकरण के बाद मंगलवार को विकास भवन में सन्नाटा पसरा रहा। कलेक्ट्रेट से लेकर शहर के हर वर्ग में सांसद निधि में कमीशन मांगे जाने के वायरल ऑडियो की चर्चा होती रही।
सांसद निधि के खाते में हैं एक करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2019-20 में सांसद निधि में पांच करोड़ मिला था। 49 प्रोजेक्टों पर 487.80 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। दस लाख रुपये प्रशासनिक मद में खर्च हुए। 2.20 लाख रुपये बचे हैं। कोरोना संक्रमण की वजह से 2020-21 में सांसद निधि में कोई बजट नहीं मिला। वर्ष 2021-22 में दो करोड़ रुपये अतिरिक्त किस्त मिली थी। एक करोड़ रुपये संतकबीरनगर संसदीय क्षेत्र में शामिल जनपद अंबेडकरनगर के विधान सभा क्षेत्र आलापुर में विकास कार्य के लिए स्थानांतरित कर दिए गए। अभी सांसद निधि के खाते में एक करोड़ रुपये बचे हैं। सांसद की ओर से 23 नए प्रोजेक्टों का प्रस्ताव दिया गया है। चार स्कूलों के लिए और अन्य इंटरलॉकिंग, पुलिया, खडंजा आदि के लिए प्रस्ताव है। इधर चर्चा हो रही है कि सांसद निधि में अभी बजट है और कार्य कराए जाने हैं। ऐसे में इसमें भी कहीं कमीशन मांगे जाने का खेल न हो जाए। इसको लेकर सर्तकता बरतने की जरूरत है।
सांसद प्रवीण निषाद संसद चलने की वजह से दिल्ली में हैं। वैसे सांसद निधि में कमीशन मांगे जाने के वायरल ऑडियो के बारे में जानकारी दी गई है। सांसद ने इसे गंभीरता से लिया है। उच्च स्तरीय जांच के लिए इसकी शिकायत शासन में किए जाने की बात कही है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्र्य ने स्वत: संज्ञान लेकर पीडी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई का निर्देश दिया है।
- जय प्रकाश निषाद, सांसद प्रतिनिधि