शिक्षकों की मौत की कहानीं आस़ुओं से लिखी गई है। कोरोना काल में कुछ बच्चे अनाथ हो गए तो कुछ के सिर से मां या पिता का साया उठ गया। सिद्धार्थनगर जिले में कुल 18 शिक्षक अकाल मृत्यु की भेंट चढ़कर काल के गाल में समा चुके हैं। चंद दिनों में अपने इतने साथियों को गंवा चुके बेसिक शिक्षा परिवार में शोक की लहर है ही, सभी दिवंगत शिक्षकों के अपने मूल परिवार पर दुखों का पहाड़ ही टूट चुका है। शिक्षकों की मौत की कहानी आस़ुओं से लिखी गई है।
खेसरहा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कड़जा में कार्यरत शिक्षक अश्विनी तिवारी प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी थे। एक वर्ष पूर्व ही इनकी पत्नी का देहांत हो चुका था। सात और दस साल की अपनी दो बेटियों को बाप और मां दोनों का प्यार, दुलार देकर पालन पोषण करने वाले अश्विनी तिवारी चुनाव प्रशिक्षण में कोरोना संक्रमित होने के बाद 21 अप्रैल को अपनी दुलारी बेटियों का साथ छोड़ गए। अश्विनी के निधन के ठीक पांच दिन बाद ही उनके सेवानिवृत्त शिक्षक पिता के निधन के बाद दोनों बेसहारा बेटियों को देखकर हर किसी की आंखें भीग उठती हैं।
लोटन ब्लॉक के मुड़ली पननी निवासी शिक्षक रामानुज पांडेय लोटन में ही कार्यरत थे। कोरोना संक्रमण से 16 मई को दिवंगत रामानुज पांडेय के परिवार में दस वर्ष से कम की दो पुत्रियों सहित एक पुत्र हैं। गोरखपुर के मूल निवासी सुजीत कुमार श्रीवास्तव उसका ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सेखुई में कार्यरत थे। 16 अप्रैल को निधन हो गया। उनके दो पुत्र हैं। एक यूकेजी और दूसरा पांचवीं क्लास में है। अन्य दिवंगत शिक्षकों के परिवार की भी कमोबेश यही ग़म भरी दास्तां है। अपनों के सपनों को पूरा करते करते खुद सपना बन चुके हर शिक्षक की कहानी आंसुओं से लिखी है।