गोरखपुर। जिले में डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य है। अब तक करीब 50 हजार हेक्टेयर यानी लगभग 33 प्रतिशत धान की रोपाई ही हो पाई है। बारिश नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। मानसून खिसका तो धान के उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है।
बारिश न होने के कारण किसान खेतों में पानी चलाकर रोपाई कर रहे हैं। जो किसान पहले रोपाई कर लिए हैं उन्हें अभी तक कई बार पानी चलाना पड़ा है। इससे किसानों की लागत बढ़ रही है।
उप निदेशक कृषि धनंजय सिंह सिंह के मुताबिक, अगल-बगल के जिलों में 15 जून से ही रोपाई शुरू हो जाती है लेकिन यहां अधिकतर किसान जुलाई में रोपाई शुरू करते हैं। धान की रोपाई 15 जुलाई तक हो जाती है। इस साल अभी तक कम बारिश के बावजूद किसान अपने साधनों से पानी चलाकर रोपाई कर रहे हैं। पूरी उम्मीद है कि 15 तक रोपाई का कार्य पूरा हो जाएगा।
कृषि विज्ञान केंद्र, बेलीपार के वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत यादव ने बताया कि तकनीकी रूप से 20 जून के बाद धान की रोपाई का कार्य शुरू कर 15 जुलाई तक पूरा कर लेना चाहिए। यदि उसके बाद रोपाई हुई तो पैदावार पर असर पड़ेगा। यदि समय से बारिश हो गई तो फसल बेहतर होगी। इस समय बारिश नहीं होने पर किसान पंपिंगसेट या बिजली के मोटर से पानी चला रहे हैं। इससे किसानों की लागत बढ़ रही है। यदि बारिश कम हुई तो पैदावार पर असर पड़ेगा।
खेतों में सोलर पैनल लगवाएं किसान
वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत यादव ने कहा कि किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए हर उपाय करने चाहिए। खेत को समय से पानी मिले, इसके लिए उसे बिजली या पंपिंगसेट पर निर्भर रहने की बजाय खेत में सालेर पैनल लगवाना चाहिए। इससे पानी की समस्या से नहीं जुझना पड़ेगा। सरकार की ओर से किसानों को सोलर पैनल लगवाने के लिए विशेष छूट दी जा रही है। सोलर पंप से बिना खर्च के किसान अपने खेत में पानी जब चाहेंगे चला लेंगे।