गोरखपुर जिले में बच्चों के नियमित टीकाकरण का हाल बदहाल है। इस वर्ष अब तक केवल 24.86 फीसदी बच्चों को ही सात तरह के टीके लग पाए हैं। बच्चों को टीका लगवाने के लिए सरकारी केंद्रों पर आने में अभिभावक रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के प्रति भय भी इसका एक कारण है। वहीं, टीकाकरण की स्थिति बेहतर करने के लिए जिला प्रतिरक्षण अधिकारियों को वाराणसी में प्रशिक्षित किया गया है।
नियमित टीकाकरण अभियान के तहत जन्म से पांच साल के बीच बच्चों को सरकारी बूथों पर निशुल्क सात टीके लगाए जाते हैं। इसमें टीबी से लेकर पोलियो, जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों के टीके शामिल हैं। इस वर्ष अब तक 0 से एक वर्ष के 30,232 बच्चों में से केवल 24.56 फीसदी को ही बीसीजी का टीका लग पाया है।
40,151 बच्चों में 32.61 फीसदी को ओपीवी का टीका लगा है। 30,232 बच्चों में से 24.56 फीसदी को पेंटावेलेंट टीका लग सका है। 30,141 बच्चों में से 24.46 फीसदी को ओपीवी टीका लग सका है। 28,141 बच्चों में से 22.86 फीसदी को जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका लग पाया है। स्थिति में सुधार के लिए जिला प्रतिरक्षण अधिकारी को वाराणसी में प्रशिक्षित करते हुए शत प्रतिशत टीकाकरण का निर्देश दिया गया है।
शहरी क्षेत्र में इन इलाकों में खराब है स्थिति
गोरखनाथ, नथमलपुर, दीवान बाजार, जाफरा बाजार, अंधियारी बाग, इस्लामचक, निजामपुर और इलाहीबाग क्षेत्र। देहात इलाके में पॉली ब्लॉक के छह और भटहट ब्लॉक के सात गांवों में टीकाकरण की स्थिति बेहद खराब है।
सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि नियमित टीकाकरण के तहत बूथों पर सात तरह के टीके लगाए जा रहे हैं। यह निशुल्क है। निजी अस्पतालों में ये टीके काफी महंगे हैं। जिन इलाकों में टीकाकरण की स्थिति ठीक नहीं है। वहां पर अभियान चलाकर बच्चों को टीके लगाए जाएंगे।