राजघाट थाने में दो महिलाओं ने दर्ज कराया था केस
जमीन दिलाने के लिए दोनों महिलाओं के नाम से करा लिया था ऋण
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जमीन दिलाने के बहाने दीवानी कचहरी ले जाने और फिर वहां स्थित आंध्रा बैंक से फर्जी तरीके से ऋण लेकर कर्जदार बनाने के आरोपी संतोष को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दो महिलाओं ने मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में प्रार्थनापत्र दिया था, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई की है। आरोपी ने एक महिला के नाम पर 20 लाख और दूसरी से पांच लाख रुपये की जालसाजी की है।
चकरा अव्वल निवासी शीला ने तहरीर में बताया कि वर्ष 2015 में रुपये की जरूरत थी। कुछ लोगों ने बताया कि गोधना पत्नी सुभाष चंद्र निवासी हुमांयुपुर उत्तरी ब्याज पर लोगों को रुपया देती है। एक बार ब्याज पर रुपये लेने के बाद वापस कर दी। फिर अगस्त 2015 में मकान बनवाने के लिए रुपये की जरूरत थी।
पूर्व का परिचय होने के कारण गोधना से संपर्क किया तो कहा कि तुम अपने जमीन का कागज हमें दे दो। बैंक से तुम्हारा लोन मंजूर करा दूंगी। आरोप है कि गोधना ने कुछ सादे कागज पर महिला का हस्ताक्षर कराया। कुछ समय बीतने के बाद ऋण के बारे में पूछने पर बताया गया कि नहीं हो पाएगा। फिर घर पर नोटिस आया तो पता चला कि मेरे नाम से 20 लाख रुपये का ऋण 2015 में ही लिया चुका है।
दूसरा केस राजघाट के चकरा अव्वल महेवा चुंगी निवासी मुन्नी पत्नी दीपचंद्र ने संतोष पर दर्ज कराया। उनका कहना था कि संतोष ने जमीन दिलाने के बहाने दीवानी कचहरी परिसर में स्थित बैंक से पांच लाख का ऋण करा दिया। बाद में नोटिस आने पर जालसाजी की जानकारी हुई।