विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर हम बात कर रहे हैं उन शिक्षकों की, जो पारंपरिक पढ़ाई के से बाहर निकलकर बच्चों को न सिर्फ ज्ञान दे रहे हैं। बल्कि उन्हें भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार कर रहे हैं। ऐसे शिक्षक बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचान कर उन्हें निखारने का काम कर रहे हैं।
रोचक और व्यावहारिक तरीकों से पढ़ाने वाले इन शिक्षकों के प्रयासों का असर अब विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और बोर्ड परीक्षा में दिखने लगा है।सरकारी स्कूलों में अक्सर संसाधनों की कमी होती है, लेकिन कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिन्होंने सीमित साधनों में भी शिक्षा को एक नया आयाम दिया है।
उनकी कक्षाएं केवल पाठ्यक्रम की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वहां बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता को भी बढ़ाया जाता है। शिक्षक अब केवल किताबों के पन्नों तक ही सीमित नहीं हैं, वे बच्चों को जीवन की पाठशाला के लिए भी तैयार कर रहे हैं।
शिक्षिका माया सिंह
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जुबिली इंटर कॉलेज की डॉ. रेखा श्रीवास्तव के पढ़ाने के तरीके इतने दिलचस्प होते हैं कि बच्चे पढ़ाई में रुचि लेने लगते हैं। वैज्ञानिक प्रयोगों के जरिये भौतिकी और रसायन पढ़ाई जा रही है और भाषा की जटिलताओं को आसान किया जा रहा है। बच्चे जब चीजों को महसूस कर पाते हैं, तो वे उन्हें बेहतर तरीके से समझते और याद रखते हैं।
इनके पढ़ाएं हुए 71 छात्र डाॅक्टर बन चुके है और कई अभी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। जो बच्चे फीस नहीं दे पाते है उन्हें डॉ. रेखा अलग से पढ़ाती हैं। इसी क्रम में एडी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज माया सिंह ने बताया कि नियमित पढ़ाई के अलावा अतिरिक्त जानकारियां बच्चों को देती हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों की मानसिकता और क्षमता को समझते हुए उन्हें उसी के अनुरूप मार्गदर्शन देती हूं।