गोरखपुर जिले में प्रदूषण जांच केंद्र अब कोई भी व्यक्ति कुछ शर्तों के साथ खोल सकता है। पहले सिर्फ एनजीओ को ही केंद्र खोलने की अनुमति मिलती थी। संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) श्यामलाल ने बताया कि मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत पंजीयन तिथि के हर एक वर्ष के बाद वाहनों के प्रदूषण की जांच करानी होती है।
इसके लिए बीएस-2 एवं बीएस-3 वाहनों के लिए छह माह एवं बीएस-4 एवं बीएस-6 वाहनों के लिए एक वर्ष की समय सीमा तय की गई है। इसके लिए शहर के जिले में कुछ प्रदूषण जांच केंद्र संचालित हो रहे हैं। लेकिन शासन की मंशा है कि जिले के प्रत्येक थाना क्षेत्र में कम से कम एक प्रदूषण जांच केंद्र खोला जाए जिससे किसी वाहन स्वामी को प्रदूषण प्रमाण पत्र लेने में कोई परेशानी न आए।
ऐसे में प्रदूषण जांच केंद्र खोले जाने के लिए आवेदन मांगे जा रहे थे। आवेदन कम आए तो शासन ने अब इस व्यवस्था का सरल बना दिया है। अब जांच केंद्र खोलने के लिए एनजीओ की बाध्यता समाप्त कर दी गई है।
ये हैं शर्तें
प्रदूषण जांच केंद्र संचालित करने के लिए आवेदक को दसवीं पास होना चाहिए। बेसिक कंप्यूटर की जानकारी होनी चाहिए। स्मोक मीटर, गैस एनलाइजर, ऑक्सीजन सेंसर एवं आरपीएम टेक्नोमीटर उपलब्ध होना चाहिए। ऑनलाइन प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी करने के लिए वेबकैम, कंप्यूटर, प्रिंटर एवं इंटरनेट के लिए कनेक्शन होना चाहिए।