करीब एक सप्ताह पूर्व यूपी बोर्ड की ओर से आए एक आदेश ने देवरिया जिले के प्रधानाचार्यों को सांसत में डाल दिया। 10वीं की छमाही एवं प्री-बोर्ड के अंक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश ने ऐसे विद्यालय जहां परीक्षाएं नहीं हुई थी, वहां मनमानी नंबर चढ़ा दिए गए। कुछ स्कूलों पर प्रति छात्र वसूली करने का भी आरोप लग चुका है। कोरोना काल में अधिकारियों ने भी इस मनमानी पर रोक लगाने की कोई कोशिश तक नहीं की।
यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने 17 मई को एक आदेश जारी किया था कि 10वीं के छात्रों को प्रोन्नत करने के उनके छमाही एवं प्री-बोर्ड का अंक बोर्ड की वेबसाइट पर 20 मई तक अपलोड कर दिया जाए। बाद में तिथि आगे भी बढ़ाई गई।
यूपी बोर्ड के इस फरमान ने जिले के कई स्कूलों के प्रधानाचार्यों को सांसत में डाल दिया। कोरोना के चलते कई विद्यालयों में छमाही परीक्षा ही नहीं हुई, वहीं प्री बोर्ड परीक्षा अनिवार्य न होने से कई स्कूलों ने कराया ही नहीं। ऐसे में यह विवरण अपलोड करना एक चुनौती बन गया।