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साइबर ठगी: बैंक खाता खोलने का झांसा दिया, गोरखपुर लौटे NRI से ठग लिए 8 लाख रुपये- जानिए कैसे की ठगी

Sat, 08 Feb 2025 11:40 AM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो

सार

बरनार्ड पाल ने पुलिस को बताया कि वह धर्मशाला के मूल निवासी और अब वियना, ऑस्ट्रिया में रहते हैं। आमतौर पर अपने गृहनगर में आते जाते रहते हैं। इन दिनों घर आए हैं। एचडीएफसी बैंक और एयू स्माल फाइनेंस बैंक में एनआरआई खाता हैं। 11 दिसंबर 2024 को मोबाइल पर एक कॉल आई। जालसाज ने खुद को मेडिकल कॉलेज शाखा का आरबीएल बैंक का मैनेजर बताया।
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साइबर क्राइम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखनाथ क्षेत्र के जटेपुर दक्षिणी धर्मशाला बाजार के रहने वाले बरनार्ड पाल से जालसाजों ने आठ लाख रुपये से अधिक ऑनलाइन जालसाजी कर दी। वह कुछ दिन पहले ही वह ऑस्ट्रिया से लौटे थे। एक बैंक में खाता खोलने के नाम पर जालसाज ने फंसा लिया।

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इसके बाद एपीके (एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज या सिंपल एंड्रॉयड पैकेज) फाइल डाउनलोड कराकर दो बैंक का पूरा डिटेल लेकर रुपये दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिए। बृहस्पतिवार को साइबर थाने में केस दर्ज कर पुलिस जांच पड़ताल में जुटी है।

बरनार्ड पाल ने पुलिस को बताया कि वह धर्मशाला के मूल निवासी और अब वियना, ऑस्ट्रिया में रहते हैं। आमतौर पर अपने गृहनगर में आते जाते रहते हैं। इन दिनों घर आए हैं। एचडीएफसी बैंक और एयू स्माल फाइनेंस बैंक में एनआरआई खाता हैं।

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साइबर क्राइम - फोटो : अमर उजाला
11 दिसंबर 2024 को मोबाइल पर एक कॉल आई। जालसाज ने खुद को मेडिकल कॉलेज शाखा का आरबीएल बैंक का मैनेजर बताया। उसने आरबीएल बैंक में खाता खोलने की बात कही। बातचीत के दौरान उसने एक ऑनलाइन फॉर्म भरने को लिए कहा। इसमें उसने अन्य खाते का विवरण (एचडीएफसी, एयू स्माल फाइनेंस बैंक) भरवाया।

इसी बीच मोबाइल पर एक एपीके फाइल डाउनलोड कराया। इसके बाद मोबाइल को अपने नियंत्रण में लेकर नेट बैंकिंग से एयू स्माल फाइनेंस बैंक से 07 लाख 60 हजार 494 रुपये तथा एचडीएफसी बैंक से 84 हजार 290 रुपये विभिन्न खातों में भेज दिए।

जालसाजी के दौरान जालसाज ने एक मारुति कार का इंश्योरेंस के भुगतान का प्रयास किया। भुगतान का लिंक मारुति बीमा कंपनी की ओर से ई-मेल भेजा गया था। जब यह मेल देखा तब ठगी की जानकारी हुई। इसके बाद 22 जनवरी 2025 को साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की। बृहस्पतिवार को साइबर थाने में केस दर्ज कर लिया गया।

इस तरह बरतें सावधानी
एसपी सिटी अभिनव त्यागी
ने बताया कि एपीके फाइल इंस्टॉल होते ही फोन का डेटा एक्सेस जालसाज कर लेते हैं। साइबर अपराधी मोबाइल फोन की सुरक्षा तोड़कर ई-सिम एक्टिवेट कर लेते हैं। फिर नंबर से जुड़े खाते में ऑनलाइन ई-मेल जोड़ लेते हैं। यूपीआई एप्लीकेशन डाउनलोड कर खाते से रुपये निकाल लेते हैं।

इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि अज्ञात स्रोत से एपीके फाइल डाउनलोड न करें। केवल गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से ही एप्लीकेशन डाउनलोड करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। किसी भी अंजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। फोन का सुरक्षा सेटिंग्स ऑन रखें।
 
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