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शहर की तरह अब गांवों के मकानों का भी होगा नंबर, सेटेलाइट इमेज के लिए ड्रोन से शुरू हुआ सर्वे

Tue, 07 Jul 2020 02:21 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • राजस्व विवाद कम करने की दिशा में शासन की पहल
  • पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर सदर तहसील के पांच गांव हुए हैं चयनित
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्व विवाद कम करने की दिशा में शासन की तरफ से एक और पहल की गई है।  भारत सरकार की स्वामित्व योजना को गोरखपुर, वाराणसी समेत प्रदेश के तीन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया है।

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इस योजना का उद्देश्य, ग्रामीण इलाकों के आबादी वाले क्षेत्रों में अलग-अलग सभी के मकानों का दायरा चिह्नित करने, कौन से मकान का कौन मालिक है, यह तय करने और शहरों की ही तरह गांवों में भी मकानों को भी एक नंबर आवंटित करना है, ताकि मालिकाना हक को लेकर विवाद सुलझाने में आसानी हो।

यही नहीं, योजना के तहत कौन सी जमीन सरकारी है, इसका भी निर्धारण होगा। योजना के तहत गोरखपुर के सदर तहसील के पांच गांव चिह्नित किए गए हैं। इनमें मामापार, पेवनपुर, विशुनपुर खुर्द, रामपुर थवईपार और मठिया शामिल हैं।
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हर छह महीने में अपडेट होगा मैप

सोमवार को इन गांवों में ड्रोन की मदद से केंद्र सरकार और सदर तहसील की टीम ने सेटेलाइट इमेजिंग का काम शुरू किया। ड्रोन से सर्वे कर आबादी वाले क्षेत्रों में बने सभी मकानों, बाउंड्रीवाल की सेटेलाइट इमेज निकाली जाएगी, जो खतौनी पर गाटा संख्या के सामने छपा भी होगा। जब भी कोई खतौनी निकालेगा, उसपर मकान के चित्र समेत कई और जरूरी जानकारियां दर्ज रहेंगी।

जो सेटेलाइट मैप अपलोड रहेगा, उसे हर छह महीने पर अपडेट किया जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि, अगर उस मकान-जमीन में कोई बदलाव हुआ हो, या वहां कोई निर्माण हुआ हो तो वह सब अपडेट हो जाए।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत सदर तहसील के पांच गांव पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चयनित किए गए हैं। इन गांवों में ड्रोन से सर्वे शुरू हो गया है। प्रयास सफल हुआ तो जल्द ही दूसरे सभी गांवों में भी योजना को लागू किया जाएगा। 
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