बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अब स्तन कैंसर की भी जांच हो सकेगी। शासन से मिली मैमोग्राफी मशीन इंस्टाल होनी शुरू हो गई है। दो दिनों के अंदर मरीजों की जांच शुरू कर दी जाएगी।
बीआरडी में अब तक स्तन में गांठ की जांच अल्ट्रासाउंड से होती थी। लेकिन इससे सिर्फ गांठ का पता चल पाता था। कैंसर के लक्षणों का पता नहीं लग पाता था। ऐसे में डॉक्टर गांठ का इलाज किया करते थे। आराम न मिलने पर मैमोग्राफी जांच के लिए लिखते थे। इस पर मरीजों को निजी पैथालॉजी में जांच कराने के लिए जाना पड़ता था और उन्हें दो हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। लेकिन अब नई मशीन से मेडिकल कॉलेज में जांच कम कीमत में हो सकेगी।
रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ आरके जैन ने बताया कि मैमोग्राफी जांच में एक्सरे होता है। यह एक्सरे बेहद सूक्ष्म समस्याओं को भी पकड़ लेता है। इसमें कैल्सीफिकेशन (स्टोन जैसे अति सूक्ष्म कण) भी नजर आ जाते हैं जो कैंसर के लक्षण हैं। इसके बाद उनकी फाइन निडिल एस्पिरेशन साइटोलाजी व बायोप्सी जांच कराकर कैंसर की तस्दीक की जाती है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले करीब 20 फीसदी हैं। स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राफी मशीन आ गई है। दो दिनों के अंदर मशीन से जांच भी शुरू कर दी जाएगी।
कैंसर रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार रावत ने बताया कि 40 साल की उम्र के बाद हर दो साल व 50 की उम्र के बाद हर साल महिलाओं को स्तन की मैमोग्राफी जांच करानी चाहिए। इससे कैंसर से बचा जा सकता है।