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खुशखबर: टल सकता है गोरखपुर के 10 हजार घरों पर मंडरा रहा खतरा, जानिए कैसे

Thu, 18 Jun 2020 04:33 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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रामगढ़ ताल। - फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर के रामगढ़ ताल वेटलैंड के नोटिफिकेशन के साथ ही ताल के 500 मीटर दायरे में आने वाले करीब 10 हजार घरों के टूटने का खतरा फिलहाल टल गया है। इसमें जीडीए की कालोनियों के चार से पांच हजार घर शामिल हैं।

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की ओर से गठित हाईपावर कमेटी ने पिछले साल ही रामगढ़ताल के 500 मीटर दायरे को वेटलैंड बताते हुए निर्माण को ध्वस्त करने की सिफारिश की थी। हालांकि जीडीए की भी दलील थी कि ताल के 50 मीटर तक ही निर्माण पर प्रतिबंध है क्योंकि वहीं तक वेटलैंड का दायरा है। फिलहाल एनजीटी में मामला लंबित है।

जीडीए भी वन विभाग की तरफ से रामगढ़ताल के वेटलैंड एरिया के नोटिफिकेशन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। प्राधिकरण अब इस नोटिफिकेशन को ग्राउंड बनाकर एनजीटी में अपना पक्ष रख सकेगा।
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यूपी का पहला वेटलैंड
वेटलैंड मैनेजमेंट 2010 हुआ करता था। तब राज्य सरकारें काम नहीं कर पाती थीं। सारा अधिकार केंद्र सरकार के पास था। बाद में राज्य सरकारों ने सिफारिश की तो वेटलैंड मैनेजमेंट 2017 की घोषणा हुई। इसके तहत वेटलैंड तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास आ गया। इस एक्ट के तहत रामगढ़ताल को यूपी का पहला वेटलैंड घोषित किया गया है।

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योगी के प्रयासों से ही बदली रामगढ़ताल की सूरत

रामगढ़ताल के संरक्षण एवं सुंदरीकरण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सांसद रहते हुए ही संजीदा थे। कई बार मामला संसद में उठाया। लंबे प्रयासों का नतीजा रहा कि रामगढ़ताल को राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना में शामिल किया गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने न केवल रामगढ़ताल सुंदरीकरण के पुराने कामों में तेजी आई, बल्कि नया सवेरा, स्पोर्टस एक्टिविटी समेत ताल के इर्द-गिर्द कई नई परियोजनाएं शुरू करवाईं।
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