गोरखपुर। अब रीसस मकाक बंदरों (लाल मुंह वाले बंदर) को पकड़ने के लिए वन विभाग की अनुमति नहीं लेनी होगी। नगर निगम, नगर पंचायत, पालिकाएं और ग्राम पंचायतें सीधे अपने स्तर पर विशेषज्ञों की मदद से बंदरों को पकड़वा सकेंगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय के अनुपालन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग के प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी ने कार्य योजना जारी कर जिलाधिकारियों को अनुपालन के निर्देश दिए हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार, बंदरों (रीसस मकाक) को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत पकड़ने की छूट दी गई है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन स्तर बंदरों के कारण उत्पन्न होने वाले संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए अंतरित कार्य योजना बनाई गई है। बंदरों को संरक्षित वन क्षेत्र में नहीं छोड़ा जाएगा। बल्कि सामान्य वन क्षेत्र या ऐसे स्थान पर छोड़ा जाएगा जहां आबादी न हो। बंदरों को पकड़ने में विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
डीएम की अध्यक्षता में गठित होगी हाईपावर कमेटी
बंदरों को पकड़ने और उनके वस्थिापन तक की प्रक्रिया की निगरानी के लिए दीपक मीणा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित होगी। एसएसपी, नगर आयुक्त, डीएफओ, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी सदस्य एवं वन्यजीव के क्षेत्र में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था के प्रतिनिधि सदस्य होंगे। यह कमेटी सुनिश्चित करेगी कि बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया सुरक्षित हो और उनके भोजन-पानी का प्रबंधन वन क्षेत्रों में सही ढंग से हो।
इस संबंध में अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने कहा कि नगर निगम पहले भी रीसस मकाक बंदर को पकड़ रहा था लेकिन शासन के आदेश के अनुपालन में यह काम बंद हो गया। अब इसे पुन: नए सिरे से शुरू किया जाएगा। अन्य विभागों से समन्वय कर बंदरों के हॉट स्पॉट वाले स्थल चिन्हित किए जाएंगे।