गोरखपुर। शहर में बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए अब प्रशासन ने तकनीक और सख्त नियमों का सहारा लेने की तैयारी कर ली है। जिले लागू की जा रही आरटीसी (रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन) योजना के तहत ट्रैफिक पुलिस ने कार्ययोजना तैयार की है। इसमें जागरूकता, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग सुधार और टेक्नोलॉजी के माध्यम से ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
एसपी ट्रैफिक अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस योजना के तहत सबसे पहले लोगों को यातायात नियमों के पालन के प्रति जागरूक किया जाएगा। निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। इसके लिए जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट एडवायजरी कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, परिवहन विभाग और व्यापारिक संगठनों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। त्योहारों और वीआईपी मूवमेंट से पहले ट्रैफिक एडवायजरी जारी कर सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से लोगों को जानकारी दी जाएगी।
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सख्ती भी इस योजना का अहम हिस्सा है। शहर में भारी वाहनों के प्रवेश के लिए तय समय के अनुसार नो एंट्री लागू की जाएगी। नो पार्किंग में खड़े वाहनों पर जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि रॉन्ग साइड ड्राइविंग पर कड़ी कार्रवाई होगी। चौराहों के 100 मीटर के दायरे में पिक एंड ड्रॉप पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पीक आवर्स के दौरान संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।
सड़कों की मरम्मत से लेकर डिवाइडर निर्माण और यू-टर्न की व्यवस्था
इंजीनियरिंग सुधार के तहत सड़कों की मरम्मत, डिवाइडर निर्माण, यू-टर्न व्यवस्था और रोड चौड़ीकरण किया जाएगा। जहां ट्रैफिक की समस्या अधिक है, वहां बॉटलनेक (सड़क का पतला हिस्सा) को चिह्नित कर मार्गों को री-डिजाइन किया जाएगा। प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग ट्रैफिक फ्लो के अनुसार बदली जाएगी। इसके साथ ही एआई आधारित स्मार्ट सिग्नल सिस्टम लागू करने की योजना है, जिससे रियल टाइम ट्रैफिक कंट्रोल संभव हो सकेगा और जाम की स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया जा सकेगा। अतिक्रमण भी ट्रैफिक जाम का एक बड़ा कारण माना गया है। इसे देखते हुए नगर निकाय के साथ मिलकर सड़कों और फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। पटरी दुकानदारों को निर्धारित वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया जाएगा, ताकि मुख्य मार्गों पर यातायात बाधित न हो।
ई-रिक्शा संचालन व्यवस्थित करने की दिशा में भी चल रहा काम
ई-रिक्शा संचालन को भी व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। शहर को अलग-अलग जोन और सेक्टर में बांटकर ई-रिक्शा के लिए रूट तय किए जाएंगे। कलर कोडिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ई-रिक्शा निर्धारित क्षेत्र में ही संचालित हों। गैर-पंजीकृत ई-रिक्शा के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जाएगी, जबकि अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को ई-रिक्शा मुक्त घोषित करने पर भी विचार किया जा रहा है।