खोराबार के धर्मेंद्र कुमार बताते हैं, उनकी रिश्तेदारी में एक महिला ने फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली थी। उन्हें भी मुल्जिम बना दिया गया। बताते हैं, उनका दोष सिर्फ इतना था कि रिश्तेदारी में होने की वजह से घर में विवाद होने पर बड़े बुजर्गों के बीच हुए पंचायत में वह भी शामिल होने के लिए चले गए थे। करीब एक साल मुझे केस झेलना पड़ा। कुशीनगर में केस होने की वजह से पुलिस जांच के नाम पर दो दिन में बुलाया जाता था। सब काम छोड़कर वहां पर जाना पड़ता था।
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विवेचक (जांच अधिकारी) भी कहते थे कि मुझे मालूम है, आप नहीं थे, लेकिन इसे साबित करना पड़ेगा। बाद में मेरे मोबाइल का लोकेशन निकाला गया। उसके बाद मेरे हाथ एक सीसी टीवी फुटेज लग गया, जिसमें मैं घटना के समय एक दुकान पर मौजूद दिख रहा था और दर्ज केस में यह बताया गया था कि मैंने ही पति के साथ मिलकर गला दबाया है। तब जाकर एक साल बाद इस केस से छूटकारा मिल सका। सभी लोग यही कहते थे, झूठे आप गए। घरवाले भी एक समय के बाद साथ छोड़ने लगे थे। खुद को सही साबित करने तक सामाजिक, आर्थिक और सबसे ज्यादा मानसिक उत्पीड़न बहुत सहना पड़ा।