समिति के सचिव त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि वर्ष 2011 से सचिव हूं। बैंक का नोटिस देना पूरी तरह से गलत है। बैंक के हिसाब में गड़बड़ी हुई है। इस मामले को बैंक के सामने रखा जाएगा। करीब 70 प्रतिशत लोगों ने लोन की रकम जमा कर दी है। ऐसे लोगों के भी नाम सूची में शामिल हैं। इसका हिसाब करके बैंक को दिया जाएगा।
शिक्षकों और कर्मियों में नाराजगी
बैंक की ओर से नोटिस मिलने की जानकारी जब शिक्षकों और कर्मचारियों को हुई तो उन्होंने नाराजगी व्यक्त की है। कुछ कर्मियों ने बताया कि काफी कर्मचारी और शिक्षक लोन की रकम जमा कर चुके हैं। सहकारी समिति की ओर से उन्हें नो-ड्यूज भी दिया जा चुका है। इसके बाद भी ऐसे कर्मियों के नाम सूची में दर्ज हैं। इसकी आपत्ति सचिव को फोन पर कर्मी और शिक्षक दर्ज करा चुके हैं।