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नगर निकाय चुनाव: मतदान में शहरियों को आइना दिखा रहे ग्रामीण वोटर

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2012 में नगर निगम में महज 33 फीसदी हुई थी वोटिंग, 2017 में 35.71 फीसदी पहुंचा आंकड़ा
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नगर पंचायतें लगातार फर्स्ट डिवीजन हो रही हैं पास, 2012 में 64.21 तो 2017 में 66.76 फीसदी हुई थी वोटिंग
अरुण चंद
गोरखपुर। नगर निकाय चुनाव में नगर निगम क्षेत्र में मतदान को लेकर शुरू से ही उदासीनता बरकरार है तो वहीं नगर पंचायतें फर्स्ट डिवीजन पास हो रही हैं। नगर निगम में पिछले तीन बार से वोटिंग प्रतिशत का ग्राफ बढ़ तो रहा है मगर उसकी रफ्तार बहुत धीमी है। वर्ष 2012 के चुनाव में निगम के 70 वार्ड में जहां महज 33 फीसदी वोटिंग हुई वहीं 2017 में यह आंकड़ा 35.71 फीसदी पर पहुंचा। यानी 2.71 फीसदी अधिक वोटिंग हुई। इस बार 2023 के चुनाव में वोटिंग प्रतिशत ज्यादा सुधरने की आस थी मगर मौसम के साथ देने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ। पिछले यानी 2017 के चुनाव की तुलना में महज एक फीसदी ज्यादा लोगों ने मतदान किया। इस बार 36.74 फीसदी मतदान हुआ है। वहीं नगर पंचायतों के मतदाता हर बार से फर्स्ट डिवीजन पास हो रहे हैं। हालांकि पिछले बार की तुलना में इस बार वोटिंग के मामले में नगर पंचायतों में करीब चार फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की है। 2012 में नगर पंचायतों में कुल 64.21 फीसदी, 2017 में 66.76 फीसदी मतदान हुआ था जो इस बार घटकर 62.05 फीसदी हो गया है।
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अपना शहर है, जिम्मेदारी भी खुद उठानी पड़ेगी
शहर अपना है। इंदौर की तरह हम यह तो चाहते हैं कि गोरखपुर का भी नाम हो। सड़कों से लेकर गलियां तक चमके, हरियाली हो। मगर जब इस दिशा में योगदान की बात आती है तो हम पीछे हट जाते हैं। जब तक सशक्त जनप्रतिनिधि नहीं चुनेंगे, तब तक विकास कैसे संभव है। अब तो पहले की तुलना में निर्वाचन आयोग सुविधाएं भी ज्यादा मुहैया करा रहा है। बूथ के पास तक गाड़ियां ले जाने की छूट है। रिक्शा, ऑटो, टैक्सी भी चल रही है। बावजूद इसके हम घरों से बाहर नहीं निकल रहे। मतदान वाले दिन अवकाश भी घोषित रहता है, फिर भी हम घरों में पड़े रहते हैं जो ठीक नहीं है। सभी को जागरूकता दिखानी होगी और मतदान में शामिल होना पड़ेगा। - विनोद राय, रेलवे कर्मचारी नेता
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मतदाता सूची भी दुरुस्त करना जरूरी
कम मतदान की बड़ी वजह मतदाता सूची की गड़बड़ियां भी हैं। वर्षों से मतदाता सूची का ठीक से पुनरीक्षण नहीं हो रहा। इसे दुरुस्त नहीं किया जा रहा है। पुनरीक्षण अभियान के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। बीएलओ मनमाने तरीके से वोटरों के नाम काट दे रहे हैं। जो मर गए हैं, या कहीं दूसरे जिले में शिफ्ट हो गए हैं, उनके नाम हटाए नहीं जा रहे। निर्वाचन आयोग द्वारा जनसंख्या की तुलना में वोटरों की संख्या का तय मानक है। मतदाता सूची में मरे हुए या बाहरी लोगों के नाम भी दर्ज होने से यह संख्या बढ़ जाती है नतीजतन बीएलओ बिना परीक्षण ऐसे वोटरों के नाम काट दे रहे हैं जो यहां के स्थायी निवासी हैं और हर चुनाव में मतदान करते आ रहे हैं। लोगों को भी लोकतंत्र की महत्ता समझनी होगी और सभी जरूरी काम किनारे कर पहले मतदान करना होगा। - अरविंद पांडेय, समाजसेवी



वर्ष 2017 में कहां कितनी हुई थी वोटिंग

नगर निगम/ नगर पंचायत वोटिंग प्रतिशत 2017 वोटिंग प्रतिशत 2012
नगर निगम 35.71 33

पीपीगंज 73.33 70

मुंडेरा बाजार 72.88 66

पिपराइच 67.79 68.47

गोला बाजार 67.51 68

सहजनवां 61 63.05

बांसगांव 60.52 58

बड़हलगंज 60.03 56

संग्रामपुर ऊनवल 59.04 -
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