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Gorakhpur News: एनएचएआई की टीम ने परखी जंगल कौड़िया-जगदीशपुर फोरलेन की गुणवत्ता

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जंगल कौड़िया (गोरखपुर)। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की क्वालिटी ऑडिट टीम ने रविवार को जंगल कौड़िया-जगदीशपुर फोरलेन के निर्माण कार्य की गुणवत्ता परखी। करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत से बन रही 26.6 किलोमीटर लंबी सड़क के निरीक्षण के दौरान टीम ने रोहिन नदी के किनारे जलभराव मिलने पर नाराजगी जताई। अधिकारियों ने कार्यदायी संस्था को जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और सुरक्षा दीवार की ऊंचाई बढ़ाने के निर्देश दिए।
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दिल्ली से आई टीम मानीराम में रोहिन नदी के किनारे पहुंची, जहां से फोरलेन का निर्माण शुरू होता है। यहां सड़क के घुमावदार हिस्से में जलभराव देखकर अधिकारियों ने बारिश के दौरान पानी की निकासी के लिए नालियों को दुरुस्त करने को कहा। टीम ने स्थानीय लोगों से बाढ़ की स्थिति और नदी के अधिकतम जलस्तर के बारे में भी जानकारी ली। अधिकारियों ने सड़क को बाढ़ से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए नदी किनारे बन रही सुरक्षा दीवार को ऊंचा और मजबूत करने का सुझाव दिया।
टीम ने कार्यदायी संस्था विजय कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय मिश्रा, कौशिक कुमार सिंह, अनूप कुमार सिंह सहित अन्य अभियंताओं से निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने रेलवे और सिंचाई विभाग से समन्वय स्थापित कर रोहिन नदी के अधिकतम जलस्तर का पता लगाने के निर्देश भी दिए।
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75 प्रतिशत काम पूरा, मार्च 2027 तक लक्ष्य
भारतमाला परियोजना के तहत बन रही जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड का करीब 75 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। मानीराम छोर पर रोहिन नदी के किनारे 560 मीटर लंबा घुमावदार हिस्सा लगभग तैयार है। यहां गोरखपुर-सोनौली मार्ग के ऊपर बने ओवरब्रिज का निर्माण भी पूरा हो गया है। हालांकि, कुछ हिस्सों में मिट्टी और रेत की भराई, समतलीकरण तथा सड़क की ऊंचाई बढ़ाने का काम अभी जारी है। बारिश के दौरान जलभराव की आशंका को देखते हुए जलनिकासी व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनवरी 2024 में शुरू हुई इस परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

शहर को जाम से मिलेगी राहत
रिंग रोड के चालू होने से गोरखपुर शहर के भीतर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। कुशीनगर से नेपाल जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। इसके अलावा, मानीराम के पास बन रहे जवानों के बटालियन भवन तक पहुंचना आसान होगा। सर्विस लेन के माध्यम से यह मार्ग बालापार-गांगी बाजार सड़क से जुड़ेगा, जिससे आयुष विश्वविद्यालय तक आवागमन भी सुगम हो सकेगा।
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कोट
एनएचएआई के उच्च अधिकारी निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच करते हैं, ताकि कोई कमी न रह जाए।
-अंकित, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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