लोहिया आवंटियों को कब्जा नहीं दे पाने की वजह से जीडीए पर दबाव बढ़ता जा रहा था। किरकिरी भी हो रही थी। प्राधिकरण की एक्शन टेकेन रिपोर्ट पर एनजीटी की सहमति से आवंटियों के साथ जीडीए भी राहत महसूस कर रहा है। एनजीटी की तरफ से गठित हाई पावर कमेटी ने 2019 के अंतिम में रामगढ़ताल के 500 मीटर के दायरे को वेटलैंड बताते हुए नए निर्माण पर रोक और जो निर्माण हो चुके हैं, उन सभी को ध्वस्त कराने की एनजीटी से संस्तुति की थी।
लोहिया एन्क्लेव के भी इसी दायरे में आने से आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पा रहा था। पिछले महीने शासन ने रामगढ़ताल वेटलैंड का नोटिफिकेशन कर दिया, जिसमें 28 में से 22 जगहों पर सिर्फ ताल से 50 मीटर का दायरा वेटलैंड घोषित किया गया। लोहिया एन्क्लेव का कोई भी हिस्सा वेटलैंड में शामिल नहीं है। इस नोटिफिकेशन से आवंटियों और जीडीए की राह, एनजीटी में काफी आसान हो गई।
आवंटियों ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
लोहिया एन्क्लेव समिति के अध्यक्ष अरुण सिंह और उपाध्यक्ष अवनीश शुक्ला समेत सभी पदाधिकारियों व आवंटियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के प्रयास से समय पर रामगढ़ताल वेटलैंड नोटिफिकेशन हो पाया, जिससे एनजीटी से राहत मिल गई।
बता दें कि गत दिनों आवंटियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपील की थी कि वे खुद अपने हाथ से उन्हें कब्जा प्रपत्र वितरित करें। आवंटियों के अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने जीडीए को जल्द रजिस्ट्री शुरू करने के साथ लोहिया एन्क्लेव के बाकी बचे सभी काम भी पूरे कर आवंटियों को कब्जा देने को कहा था।
जीडीए सचिव रामसिंह गौतम ने कहा कि एनजीटी ने प्राधिकरण की एक्शन टेकेन रिपोर्ट पर सहमति जताई है। वेटलैंड के नोटिफिकेशन से भी स्पष्ट है कि किस अराजी संख्या में निर्माण पर बंदिश है। प्राधिकरण के पुराने निर्माण से लेकर नई योजनाओं तक पर किसी तरह का संकट नहीं है। लोहिया आवंटियों की अब रजिस्ट्री शुरू हो जाएगी। जल्द उन्हें कब्जा मिल जाएगा।