यहीं नही, जमीन लावारिस घोषित करते हुए ग्राम सभा के नाम दर्ज करने को लेकर जो रिपोर्ट लगाई गई उसमें तहसील प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि वारिसों की तलाश में लेखपालों की टीम कोलकाता भेजी गई थी। मगर उन्हें संबंधित पते पर कोई मिला नहीं। जबकि, आलोक कृष्ण मुखर्जी और उनका पूरा परिवार कोलकाता के बासुलेन रोड स्थित बाकुलिया हाउस नामक भवन में आज भी रह रहा है। इस इमारत के मुख्य द्वार पर आज भी केदारनाथ मुखर्जी का नाम दर्ज है।
सीएम से की गई थी 2018 में शिकायत
सोशल मीडिया पर इस भवन की फोटो और वीडियो भी मौजूद है। इस पूरे मामले को लेकर वर्ष 2018 में राजस्व परिषद के उप भूमि व्यवस्था आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए पीसीएस अधिकारी पुनीत शुक्ला ने मुख्यमंत्री से शिकायत भी की है। 22 सितंबर 2022 को भेजे अपने शिकायती पत्र में उन्होंने सदर तहसील प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि तहसील प्रशासन ने राजस्व नियमों की अनदेखी कर ऐसे लोगों की जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दी जिनके वारिस न केवल जीवित हैं बल्कि गोरखपुर तहसील पहुंचकर वरासत के लिए आवेदन भी किया था। अभिलेखों को ध्यान में रखकर पूर्व तहसीलदार ने वरासत भी कर दी थी लेकिन जिला प्रशासन ने फिर वरासत संबंधी आदेश को खारिज कर दिया।