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जेल नहीं भेजे जा रहे नए बदमाश, लॉकअप भी हैं खाली, जानें क्या है खास वजह

Wed, 01 Apr 2020 04:00 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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गोरखपुर जेल। - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के असर के कारण अब नए बदमाश जेल नहीं भेजे जा रहे हैं। उन्हें जमानत पर छोड़ दिया जा रहा है। जेल प्रशासन के अनुसार पिछले तीन दिनों में एक भी नया बदमाश गिरफ्तार होने के बाद जेल नहीं गया। जबकि पिछले एक सप्ताह में जबसे लॉकडाउन चल रहा है सिर्फ 9 नए बदमाशों को ही जेल भेजा गया है। जबकि आम दिनों में एक दिन में बदमाशों के जेल भेेजे जाने की संख्या तीस से चालीस होती थी।

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जिले के सभी थानों के लॉकप भी इस समय खाली हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस बदमाशों को पकड़ नहीं रही है। जरूरी होने पर पकड़ जरूर रही है। केस भी दर्ज कर रही है। जीडी पर गिरफ्तारी भी दर्ज कर रही है। लेकिन सात साल या उससे कम सजा के मामले में उन्हें थाने से ही मुचलके पर जमानत देकर छोड़ दे रही है।

लॉकडाउन में कोर्ट बंद होने से बैठ रही विशेष कोर्ट में जिन बदमाशों को पुलिस पकड़ कर उनके सामने पेश कर रही है, उन्हें भी कोर्ट अधिकांश मामलों में जमानत दे दे रही है। बहुत गंभीर अपराध में लिप्त होने पर ही उन्हें जेल भेजा जा रहा है।

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एक सप्ताह में जेल भेज गए ये बंदी

पिछले दस दिन में जिन नए बदमाशों को जेल भेजा गया है उनमें हत्या के आरोप में सहजनवां के माड़र निवासी परमानंद, जयश्री, विजय पाल, उमाशंकर। गुलरिहा पुलिस द्वारा लूट और चोरी के आराेपित आलोक कन्नौजिया, अजय कुमार, सानू उर्फ सहनवाज, अवधेश और अरूण वर्मा को जेल भेजा गया है।

एक सप्ताह में सैकड़ों को पकड़ा, थाने से छोड़ा
पिछले एक सप्ताह में जिले की पुलिस ने सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जिनमें कच्ची शराब के कारोबारी, जुआ खेलकर लॉकडाउन का उल्लंघन के आरोप में, अंधविश्वास कर भीड़ लगाने वाले, लॉकडाउन में भीड़ लगाने वाले, अफवाह फैलाने वाले, वारंटी आदि शामिल हैं। जिन्हें मुचलके पर थाने से छोड़ा गया या कोर्ट ने जमानत दे दी।

जिनमें बाबू खान, अक्षय कुमार, कालिंदी, राम सिंह, डिंपल, इकबाल, पवन, गुलाब, प्रमोद, अक्षय लाल, दीप रंजन, अनिरूद्, टाउंर, मोहनलाल, कोईल, सुनील गुप्ता, रमाशंकर, सेराज, धर्मवीर यादव, जंगली, मोनू उर्फ अमित, विजय केवट, जामवंत, पिम्मन बेलदार, राहुल, जियावन, राजेश, राजू, राममिलन, ब्रम्हदेव,रीना, सुनील, दीपक, प्रेमलता आदि शामिल हैं।
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बाहर वर्ष में पहली बार जेल में बंदियों की संख्या पंद्रह सौ के करीब

मंडलीय कारागार में यह बारह वर्षों में यह पहली बार हुआ है कि जेल में बंदियों की संख्या लगभग पंद्रह सौ के करीब आई है। इससे पहले वर्ष 2008 में ऐसा हुआ था। जेल की संख्या अभी एक दो दिन में और घटेगी। यह संभव हुआ है कोरोना की वजह से जेल से पेरोल पर छोड़े जाने वाले बंदियों की वजह से।

पिछले तीन दिनों में 168 बंदियों को छोड़ा जा चुका है। एक समय था कि जेल में बंदियों की संख्या दो हजार के करीब पहुंच गई थी। पिछले सप्ताह यह संख्या करीब 1700 थी। हालांकि अभी भी यहां बंदियों की संख्या क्षमता से ज्यादा है। यहां की क्षमता केवल 856 बंदियों की है।

घर पहुंचे 94 वर्ष के हत्या के कैदी
हाईकोर्ट से आजीवन कारावास की सजा निलंबित होने के बाद जेल प्रशासन 94 वर्ष के बुजुर्ग आजीवन कारावास के कैदी सिकरीगंज के सूर्यवंश को देर रात रिहा कर दिया। वे सुबह घर पहुंचे। लंबे समय बाद घर पहुंचे सूर्यवंश को देखकर घरवालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 27 मार्च 1978 में दर्ज हत्या के मुकदमें में निचली अदालत ने 42 साल बाद 24 जनवरी 2020 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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