उन्होंने यह कहते हुए सरकार का विरोध किया था कि कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को नेपाल के नक्शे में शामिल करने का सरकार के पास कोई आधार नहीं है। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया था जिसके अनुसार किसी राष्ट्रीय प्रतीक में बदलाव के लिए पर्याप्त आधार की आवश्यकता है।
उनका दावा था कि सरकार ने इस विधेयक में नए नक्शे में शामिल किए जा रहे इलाकों को लेकर कोई आधार या सबूत नहीं दिया है। ओली सरकार से पूछा था कि सीमा विवाद तो चीन के साथ भी है चीन के पास हमारी जो जमीन है उसे नक्शे में क्यों नहीं शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने नए नक्शे के विरोध में संसद में एक संशोधन प्रस्ताव पेश कर देश का पुराना नक्शा ही जारी रखने की मांग की थी। स्पीकर ने उनका प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा की रूल बुक की धारा 122 के आधार पर खारिज कर दिया। यह नियम कहता है कि कोई संशोधन बिल की मूल भावना के खिलाफ नहीं हो सकता है। इसके बाद सरिता गिरी सदन से बाहर चली गईं।
एक अन्य खबर के मुताबिक नेपाल में भारतीय चैनलों के प्रसारण पर रोक लगा दी गई है। इसलिए अब सीमा पार के भारतीय मूल के नेपाली जन हिंदी समाचारों को नहीं देख सकेंगे। इसे राजनीतिक क्षेत्रों में भारत विरोध और चीन के समर्थन में एक और कदम बताया जा रहा है। बता दें कि भारतीय इलेक्ट्रानिक मीडिया चीन की दादागीरी का खुल कर विरोध कर रही है। जिससे माना जा रहा है कि नेपाल ने चीन के दबाव में यह कदम उठाया है।