महाराजगंज के घुघली के रहने वाली चार साल की मासूम अंशु के आंख में बच्चों के साथ खेलते समय सुई धंस गई। घाव उसके कार्निया तक पहुंच गया है। मंगलवार को परिजन उसे इलाज के लिए शहर लेकर आएं थे और नेत्र रोग विशेषज्ञों के दो प्राइवेट अस्पतालों से संपर्क किया। लेकिन दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों ने लॉकडाउन का हवाला देकर इलाज करने से मना कर दिया।
परिजन आईएमए के अध्यक्ष डॉ एससी कौशिक और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. इमरान अख्तर से संपर्क किया। निजी अस्पतालों में जांच न होने पर परिजन बीआरडी मेडिकल कॉलेज गए। जहां डॉक्टरों ने मासूम को दवा दी। एक सप्ताह बाद उसे फिर से बुलाया गया है।
नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ राम कुमार जायसवाल नव बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। पता कराया जाएगा की बच्ची का ऑपरेशन करना होगा या नहीं। वहीं नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. वाई सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के कारण नेत्र रोग विशेषज्ञ को किसी भी प्रकार के इलाज करने पर रोक है। हम इमरजेंसी भी नहीं चला सकते। जबकि आंखों के गंभीर मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं।
प्रशासन ने जो नियम बनाए हैं। वह कुछ समस्याओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाए हैं। आंखों के मामले में इलाज न मिलने पर रोशनी जाने का खतरा होता है। नेत्र रोग विशेषज्ञों को इमरजेंसी करने की अनुमति मिलनी चाहिए। देर होने पर मासूम के आंखों की रोशनी छिन सकती है।
डॉ.एससी कौशिक, अध्यक्ष, आईएमए