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Gorakhpur News: सर्वार्थसिद्धि योग में शुरू होगी नवरात्र, घोड़ा पर सवार होकर आएंगी भगवती

Sun, 04 Aug 2024 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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सर्वार्थसिद्धि योग में शुरू होगी नवरात्र, घोड़ा पर सवार होकर आएंगी भगवती

-नाै अप्रैल से शुरू होगी नवरात्र, मंदिरों व घरों में शुरू हुई तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। नववर्ष और वांसंतिक नवरात्र नौ अप्रैल से शुरू होगा। सर्वार्थसिद्धि योग तथा अमृत योग में वासंतिक नवरात्र के आरंभ होने से वर्ष अनुकूल रहेगा। इस वर्ष वासंतिक नवरात्र मंगलवार से प्रारंभ होगा। मंगलवार से नवरात्र का आरंभ होगा और माता दुर्गा का वाहन अश्व (घोड़ा) है। शुभ मुहूर्त में भगवती घोड़े पर सवार होकर आ रही है।
ज्योतिर्विदों के अनुसार नवरात्र में सर्वार्थसिद्धि योग में शुरू होने वाले नवरात्र में भगवती घोड़े पर सवार होकर आएंगी, इससे सुख समृद्धि की संभावना है, जबकि प्राकृतिक असंतुलन की आशंका है।
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नवरात्र प्रतिपदा को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 46 मिनट बजे होगा। प्रतिपदा तिथि का मान सम्पूर्ण दिन और रात्रि में नौ बजकर 44 मिनट तक रहेगा। वैधृति योग दिन में तीन बजकर 17 मिनट तक रहेगा, उसके बाद विषकुम्भ योग है। इस दिन नवरात्र व्रत के निमित्त कलश की स्थापना की जाएगी। जो साधक प्रथम और अंतिम दिन नवरात्र व्रत रखना चाहते हैं, वे नौ अप्रैल को और 16 अप्रैल को व्रत रखेंगे।

इस बार नौ दिन का नवरात्र व्रत होगा। व्रत की पूजा परम सिद्धि दायिनी है। इसमें नौ दिनों तक व्रत किया जाता है। व्रत करने वाले को नौ दिनों तक केवल एक समय भोजन करना चाहिए। जो सभी नौ तिथियों में उपवास नहीं कर सकते हैं, वे यदि सप्तमी, अष्टमी और नवमी में उपवास करें तो भी उनकी कामना सिद्ध हो जाती है। ये तिथियां महासप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी हैं। इसमें दो तिथियां महासप्तमी और महानवमी को शुभ दिन सोमवार और बुधवार है। नवरात्र में सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथियों का सर्वाधिक महत्त्व है।
15 अप्रैल सोमवार को महासप्तमी व्रत है। इस दिन सूर्योदय पांच बजकर 42 मिनट पर और सप्तमी दिन में तीन बजकर 38 मिनट, पश्चात अष्टमी तिथि है। इस दिन अर्धरात्रि में अष्टमी होने से महानिशा पूजा होगी।
16 अप्रैल को सूर्योदय पांच बजकर 41 मिनट पर और अष्टमी तिथि दिन में चार बजकर 17 मिनट से नवमी तिथि रहेगी। उदयातिथि में अष्टमी होने से महाष्टमी व्रत के लिए यही दिन मान्य रहेगा। जो आदि और अंत का नवरात्र व्रत करते हैं, उनके लिए यह दिन सर्वोत्तम है।
17 अप्रैल बुधवार को है। इस दिन भी सूर्योदय पांच बजकर 40 मिनट और नवमी तिथि सायंकाल पांच बजकर 22 मिनट है। सूर्योदय से लेकर सांयकाल तक नवमी तिथि विद्यमान होने से यह महानवमी के लिए ग्राह्म है।
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ज्याेतिर्विद पं. शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि नवरात्र प्रतिपदा को दो अच्छे योग हैं। नवरात्र में शक्ति उपासना ज्यादा फलदायी होती है। नवरात्र में कलश स्थापना दिन में ही किया जाता है। रात्रि में कलश स्थापन का निषेध है। इस वर्ष सूर्योदय पांच बजकर 46 मिनट पर है और सूर्यास्त सांयकाल छह बजकर 14 पर है। इस बीच कभी भी कलश का स्थापन किया जा सकता है। परंतु द्विस्वभाव लग्न कलश स्थापन के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक है। यह कलश स्थापन के लिए अत्यंत श्रेयस्कर है।

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