म्हारी छोरियां छोरों से कम है के ...फिल्म की ये लाइन जब कोई बालिकाओं के सामने बोल देता है तो उनका उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। इस मामले में गोरखपुर की लड़कियां भी कम नहीं हैं, उन्हें जब भी मौका मिलता है वह नया इतिहास रचती है और देश भर में अपने नाम का डंका बजाती है। खेल,राजनीति,विज्ञान सभी क्षेत्र में मुकाम हासिल कर रहीं हैं।
समृद्धि सिंह गोरखपुर की उभरती हैंडबॉल चैम्पियन है। मेडिकल कॉलेज के पास लक्ष्मी नगर कालोनी में रहने वाली समृद्धि के पिता संतोष कुमार रेलवे में कर्मचारी है और माता ममता सिंह गृहणी है।कक्षा 8 से खेलना शुरु किया।समृद्धि पूर्वांचल विश्विद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है।
एशियन चैम्पियनशिप, इंटरनेशनल हैंडबॉल फेडरेशन की बांग्लादेश में गोल्ड मेडल जीता।ताशकंद उजबेकिस्तानइंटर क्वॉड्रिलैटरल एशियन में टीम ने सिल्वर मेडल जीता जिसमें समृद्धि वाइस कैप्टन रहीं हैं।छोटा भाई उज्जवल प्रताप सिंह दीदी को खेलता देख प्रेरित होता है। इससे पहले समृद्धि ने जूनियर स्टेट स्तर पर 2019 में खेला जिसमें टीम ने ब्रांज मेडल जीता।नफिस खान और तौकिर खान के निर्देशन में प्रशिक्षण ले रही हैं। समृद्धि का लक्ष्य भारत की बेस्ट पेनाल्टी शूटर बनना हैं।
वहीं 18 वर्षीय नंदानगर की निक्की ने दिसंबर में खेले गए नेशनल हैंडबॉल गेम में ब्रांज मेडल जीतने वाली टीम का हिस्सा रहीं हैं।2007 में पिता विजय चौहान की मृत्यु के बाद माँ किरण देवी और भाई विकास ने घर संभाला। 2018 से कक्षा 8 में पढ़ते वक़्त पड़ोस की दीदी को अच्छा खेलते देख निक्की की खेल के प्रति रुचि बढ़ी।जिसके बाद निक्की ने रीजनल स्टेडियम में खेलना शुरू किया।निक्की ने मंडल से पहला खेल खेला।अभी तक 8- 9 टूर्नामेंट खेल चुकी हैं।