आस्था : नरक में जाने से मुक्ति दिलाती है नरक चतुर्दशी
गोरखपुर। दीप पर्व दिवाली से एक दिन पहले शुक्रवार को नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन छोटी दिवाली भी मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल या उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। साथ ही विधि-विधान से मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने वालों को नरक जाने का भय नहीं रहता।
ये है पौराणिक मान्यता
पंडित अवधेश मिश्रा ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर को क्रूर कर्म करने से रोका। उन्होंने 16 हजार कन्याओं को उस दुष्ट की कैद से छुड़ाकर अपनी शरण दी और नरकासुर को यमपुरी पहुंचाया। इसके बाद छुड़ाई हुई कन्याओं को सामाजिक मान्यता दिलवाने के लिए सभी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इस तरह से नरकासुर से सभी को मुक्ति मिली और इस दिन से इसे नरका चतुर्दशी के रूप में छोटी दिवाली मनाई जाने लगी।
इसी दिन मनाई जाएगी हनुमान जयंती
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि इसी दिन देवी-देवताओं का पूजन कर दीप जलाना चाहिए। मंदिरों, गुप्त गृहों, रसोई घर, देववृक्षों के नीचे, सभा भवन, नदियों एवं जलाशय के किनारे, चहारदीवारी, बगीचे, गली-कूंचे, गोशाला आदि स्थान पर दीपक जलाकर रखना चाहिए। इसे रूप चतुर्दशी कहा जाता है। हनुमान जी का जन्म अर्धव्यापिनी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुआ था। संध्या बेला और रात्रि समय चतुर्दशी होने से हनुमान जी की पूजा-उपासना एवं जयंती इसी दिन होगी।