आखिरकार बशारतपुर पूर्वी निवासी मुकुल कुमार घोष को उनकी पहचान मिल ही गई। अब नगर निगम उन्हें ‘कथित’ मुकुल कुमार घोष नहीं कहेगा। निगम ने अपने सभी दस्तावेजों में उनके नाम के आगे से ‘कथित’ शब्द हटा दिया है।
बशारतपुर पूर्वी में मुकुल कुमार घोष का अपना मकान है। नगर निगम के दस्तावेजों में उनके मकान का नंबर 131-बी है। उन्होंने जब मकान बनाया तब ही नगर निगम में गृहकर निर्धारित करा लिया था। जब उनका गृह, जल और सीवर कर बिल आया तो उसमें मुकुल कुमार घोष के नाम के आगे ‘कथित’ लिखा हुआ था।
इस बात को आठ साल हो गए और मुकुल तब से ही अपने नाम के आगे लिखे ‘कथित’ शब्द को हटवाने के लिए नगर निगम के चक्कर लगा रहे थे लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। अमर उजाला ने मुकुल घोष की इस परेशानी को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मुकुल ने बताया कि फरवरी में उन्हें टैक्स की रसीद प्राप्त हुई उसमें उनके नाम के आगे से ‘कथित’ शब्द हटा दिया गया है।