कारोना काल में आने वाली समस्याओं से निपटने में बुद्धिजीवियों की बड़ी भूमिका हो सकती है। शिक्षकों के ज्ञान और शोध के माध्यम से हम कोरोना संबंधित समस्याओं का निराकरण कर सकते हैं। शिक्षकों के वैज्ञानिक शोधों के माध्यम से कोरोना के वैक्सीन और दवाइयों के खोज में मदद मिल सकती है। कोरोना से निपटने में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन असाधारण है।
यह बातें सांसद रविकिशन ने व्यक्त की। वे गुरुवार को अनलॉक अवधि की ओर जिम्मेदारी और चुनौतियों के विषय पर जूम एप से शहर के बुद्धिजीवियों से संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। रविकिशन ने कहा कि कोरोना एक वैश्विक महामारी है। बाकी दुनिया की अपेक्षा एक बड़ी आबादी को देखते हुए भारत का प्रबंधन काफी अच्छा है।
कार्यक्रम समन्वयक गोविवि के प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने कहा कि संवाद के माध्यम से ही किसी भी समस्या का हल निकलता है। कोरोना महामारी के कारण बनी परिस्थितियों में विशेषज्ञ के रूप में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी शिक्षकों ने अपने सुझाव और शोध दिए हैं, जिन्हें एकत्र करके सांसद के माध्यम से सरकार के संबद्ध मंत्रालयों तक भेजा जाएगा।
बॉयोटेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. शरद मिश्रा ने कहा कि अगले कुछ महीनों में इसका वैक्सीन बनाया जा सकता है। डॉ अंबरीष श्रीवास्तव, डॉ तूलिका मिश्रा, डॉ प्रतिमा जायसवाल ने भी अपने सुझाव दिए। कार्यक्रम में आभार ज्ञापन डॉ आशीष शुक्ला ने किया।
संवाद कार्यक्रम में प्रो. राजर्षि कुमार गौड़, डॉ मनोज कुमार तिवारी, डॉ राजेश पांडेय, डॉ अमित उपाध्याय, डॉ ओमप्रकाश सिंह, डॉ टीएन मिश्रा, डॉ आलोक कुमार, डॉ हर्ष देव वर्मा, डॉ लक्ष्मी मिश्रा, डॉ अपरा त्रिपाठी, डॉ पंकज कुमार सिंह, डॉ मनीष कुमार पाण्डेय , डॉ वंदना सिंह, डॉ कृपा मणि, डॉ सूर्यकांत त्रिपाठी, डॉ अंशू गुप्ता समेत कई शिक्षक उपस्थित रहे।