गोरखपुर। ‘मिशन मंझरिया’, एक गांव के कायाकल्प का ऐसा अभियान जिसने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अपना मुरीद बना लिया है। महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज, जंगल धूसड़ के बीएड विभाग की ओर से गोद लिए गए मंझरिया गांव में बीएड के छात्राध्यापकों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और शासन की योजनाओं से संतृप्त करने की दिशा में सेवा की नजीर पेश की है।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम में बृहस्पतिवार को सीएम योगी ने मिशन मंझरिया के रूप में एमपी पीजी कॉलेज की सेवा साधना को गांव के प्रति संस्था की जिम्मेदारी के ‘मॉडल स्टडी’ के रूप में खूब सराहा। प्रगति रिपोर्ट की स्मारिका का विमोचन करते हुए सीएम ने कहा था कि गांव के प्रति किसी शैक्षिक संस्था की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए, मिशन मंझरिया इसके लिए एक मॉडल स्टडी है। उन्होंने निरक्षरता मिटाने और स्वालंबन की राह दिखाने को अनुकरणीय बताया।
मिशन मंझरिया को मुख्यमंत्री से मिली सराहना को लेकर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार राव का कहना है कि इसकी शुरुआत सीएम योगी की ही प्रेरणा से हुई थी। इसमें 2018 से वर्तमान समय तक ‘मिशन मंझरिया’ बीएड विभाग की अद्वितीय उपलब्धि है। यह मिशन एक गांव में आठ प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से आत्मनिर्भर गांव से आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने में जुटा है।
ऐसे काम होता है मिशन मंझरिया में
बीएड विभाग की अध्यक्ष शिप्रा सिंह के अनुसार, मंझरिया गांव में 178 परिवारों के अंतर्गत 843 की आबादी है। प्रत्येक परिवार को न सिर्फ मिशन के मूल उद्देश्यों से जोड़ा गया है बल्कि उन्हें पात्रता के अनुसार केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं से भी आच्छादित कराया गया है। इसके अलावा छात्राध्यापक प्रतिदिन दोपहर दो से चार बजे तक मंझरिया गांव को अपना कर्मक्षेत्र बनाते हुए शिक्षा देते हैं। इसमें स्वास्थ्य और स्वच्छता को भी शामिल किया गया है।
महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की सराहनीय पहल
मिशन मंझरिया के तहत गांव की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की पहल भी विशेष है। इसमें छात्राध्यापिकाओं द्वारा महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग आदि का हुनर सिखाया जाता है। महिलाओं को खाद्य संरक्षण कार्यशाला के माध्यम से आम का स्क्वैश, मिक्स फ्रूट जैम, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च के अचार बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।