गोरखपुर। पुत्रों के सर्वांगीण विकास, सुख-समृद्धि और दीर्घायु के लिए माताएं बुधवार को हलषष्ठी व्रत रखेंगी। षष्ठी तिथि में मध्याह्न होने के कारण बुधवार का दिन हलषष्ठी व्रत के लिए पूर्ण रूप से प्रशस्त है। पूजा के लिए मध्याह्न का समय उत्तम माना गया है।
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, बुधवार को सूर्योदय सुबह 5:44 बजे होगा। भाद्रपद कृष्ण षष्ठी तिथि पूरे दिन और रात 3:44 बजे तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी। भरणी नक्षत्र भी रात 2:09 बजे तक रहेगा, इसके बाद कृतिका नक्षत्र लगेगा। माताएं कुश को जमीन में लगाकर पूजन-अर्चन करेंगी। वहीं गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र ने बताया कि इस व्रत का संबंध भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम से है। इसलिए इसे बलराम जयंती भी कहा जाता है। बलराम को बलदेव, हलधर और हलायुध के नाम से भी जाना जाता है। उनका प्रमुख आयुध हल और मूसल है, इसी कारण इस पर्व को हलषष्ठी कहा जाता है। व्रत में तिन्नी के चावल का प्रयोग किया जाता है। इस दिन हल से जोते अन्न का सेवन वर्जित माना जाता है। गाय के दूध, दही और घी का प्रयोग नहीं किया जाता। इनके स्थान पर भैंस के दूध, दही और घी का प्रयोग पूजा और भोजन में किया जाता है।