उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में मां के संघर्षो की बदौलत औलादों ने तरक्की की बुलंदी को छू ली। ऐसी दो माताओं की दर्द भरी संघर्षपूर्ण कहानी है, जिनकी शादी के कुछ ही साल बाद पति की मौत हो जाने से जीवन की खुशियां छिन गई। दोनों माताओं ने अपनी औलादों की जिंदगी संवारने के लिए कड़ा संघर्ष किया। जिसमें एक मां के बेटे ने एसडीएम बन कर समाज में नाम रोशन किया। जबकि दूसरी मां के बेटे ने असिस्टेंट प्रोफेसर बन कर समाज में परिवार का रूतबा बढ़ाया। यह दोनों माताएं समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
महुली क्षेत्र के विश्वनाथपुर गांव की रहने वाली शकुंतला देवी पत्नी स्वर्गीय अरविंद पांडेय की शादी वर्ष 1984 में हुई थी। उनके दो बेटे पैदा हुए। वर्ष 1988 में उनके पति अरविंद पांडेय की मौत हो गई। उस वक्त उनके बड़े बेटे अभय कुमार पांडेय की उम्र ढाई वर्ष और छोटे बेटे निर्भय पांडेय की उम्र डेढ़ साल थी। उनके ससुर राम अधार पांडेय गोरखपुर के कौड़िया ब्लॉक में एडीओआईएसबी के पद पर तैनात थे।
पति की मौत के बाद शकुंतला की जिंदगी सूनी हो गई, लेकिन दोनों बेटों के सहारे जिंदगी को संवारने की कोशिश शुरू की। वह स्नातक की डिग्री ली थीं और गोरखपुर के एक स्कूल में अध्यापन कार्य करने लगीं। इधर ससुर राम अधार पांडेय ने भी ठीक प्रकार से अपने पौत्रों की देखभाल की। करीब 12 वर्षों तक शंकुतला ने प्राइवेट स्कूल में बतौर शिक्षिका काम की।
वर्ष 2012 में शंकुतला के बड़े बेटे अभय कुमार पांडेय का चयन यूपीपीसीएस में हो गया और प्रदेश में दसवी रैंक हासिल किया। वर्तमान में उनके एसडीएम बेटे की बाराबंकी जिले में तैनाती है। जबकि छोटा बेटा निर्भय पांडेय एक निजी कंपनी में एरिया मैनेजर है। शकुंतला पांडेय बताती हैं कि बच्चों ने लगन से पढ़ाई की। ससुर ने ठीक प्रकार से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया और उनकी मेहनत रंग लाई। जिसकी वजह से उनके दोनों बेटों ने कामयाबी हासिल की।