आम बजट को समाज के हर वर्ग ने अपने-अपने नजरिए से देखा है। इसीलिए हर किसी की अलग-अलग प्रतिक्रिया है। हालांकि अधिकतर का माना है कि बजट में हर वर्ग को कुछ न कुछ देने का प्रयास किया गया है। अधिकतर अर्थशास्त्रियों ने बजट की सराहना की है तो कुछ ने कई बिंदुओं की आलोचना की है।
अधिकतर उद्यमियों ने सबको फायदा देने वाला बजट बताया है। वहीं, टैक्स के स्लैब में बदलाव नहीं होने से मध्य वर्ग निराश हुआ है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने बजट को शानदार बताया है। इनका कहना है कि क्रिटिकल हेल्थ केयर सेंटर खोलने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को काफी फायदा होगा। टेली मेंटल हेल्थ केयर सेंटर को बेहतर बताया जा रहा है।
पांच नदियों को जोड़ने और डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने जैसे कदमों की प्रशंसा की जा रही है। बुनियादी ढांचा को मजबूत बनाने और रोजगार को बढ़ावा देने वाला बजट भी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इसमें ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने की दीर्घकालीन योजना है। क्रिप्टो करेंसी पर टैक्स के प्रावधान को अच्छा कदम बताया जा रहा है। वहीं, रीयल इस्टेट क्षेत्र निराश है। मंदी के दौर से गुजर रहे इस क्षेत्र को बजट से राहत पाने की उम्मीद थी।
इसी तरह कर्मचारी वर्ग ने भी बजट से असंतुष्टि जाहिर की है। उन्हें एनपीएस का अंशदान बढ़ाना पसंद नहीं आया है। उनका कहना है कि सरकार ने कर्मचारी हितों में कुछ खास प्रावधान नहीं किए हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारी भी निराश हैं। कोेरोना प्रभावित क्षेत्रों के लिए कुछ खास नहीं किए जाने की भी आलोचना की जा रही है। कहा जा रहा है कि कोरोना के कारण प्रभावित सेवा क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं किया गया है। इसी तरह घरेलू बचत को प्रोत्साहित करने के लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इससे पूंजी निर्माण का मार्ग अवरुद्ध होने की आशंका जताई जा रही है।