गोरखपुर। पिपराइच क्षेत्र के चकिया निवासी व्यवसायी श्रवण कुमार निषाद के सकुशल घर लौटने के पीछे उनकी पत्नी दीपशिखा की सूझबूझ, परिवार के त्याग और पिपराइच पुलिस की रणनीति अहम रही। पत्नी का आरोप है कि पति को छोड़ने के लिए उनके मोबाइल से आई कॉल पर 10 लाख रुपये की मांग की गई। इसके बाद परिवार ने खेत और जेवर गिरवी रखकर रकम का इंतजाम किया। वहीं, पुलिस के निर्देश पर दीपशिखा लगातार कॉल करने वालों से बातचीत करती रहीं, जिससे लोकेशन ट्रेस कर पुलिस व्यवसायी तक पहुंच सकी।
दीपशिखा ने बताया कि नौ जुलाई को उनके पति बेटी की दवा लेने शहर गए थे लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटे। रात करीब 8:45 बजे श्रवण के मोबाइल नंबर से कॉल आई। दूसरी ओर मौजूद व्यक्ति ने कहा कि यदि श्रवण सकुशल वापस चाहिए तो 10 लाख रुपये लेकर आना होगा। जब उन्होंने रुपये की व्यवस्था न होने की बात कही तो जवाब मिला कि जहां से हो सके, इंतजाम करो। इसके बाद कॉल कट गई।
घबराई दीपशिखा ने तत्काल डायल-112 पर सूचना दी। पिपराइच पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जानकारी लेने के बाद उनके मोबाइल के जरिये आगे की रणनीति बनाई। पुलिस के निर्देश पर दीपशिखा लगातार कॉल करने वालों के संपर्क में रहीं, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस की जा सकी।
परिजन के अनुसार, रकम का इंतजाम करने के लिए खेत और जेवर गिरवी रखने पड़े। इसके बाद दीपशिखा अपने बहनोई राम मिलन, देवर शनि, शनि के दोस्त राम मिलन व पिपराइच पुलिस और एसओजी की 12 सदस्यीय टीम के साथ लोकेशन ट्रेस करते हुए अंबेडकरनगर के अकबरपुर स्थित पटेलनगर तिराहे पहुंचीं। वहां श्रवण को छोड़ने को लेकर विवाद शुरू हो गया। बाद में पता चला कि उनके पति को ले जाने वाला कोई अपहरणकर्ता नहीं बल्कि अंबेडकरनगर की एसओजी टीम है, जो उनके पति को छोड़ने के एवज में 10 लाख रुपये की मांग कर रही थी।
रुपये लेकर पहुंचते ही बढ़ा तनाव, हाथापायी के बाद निकल गई पिस्टल
दीपशिखा के मुताबिक, तय स्थान पर पहुंचने के कुछ देर बाद दो वाहनों से सादे कपड़ों में चार लोग पहुंचे और कार का शीशा खोलने का दबाव बनाने लगे। इसके बाद गाली-गलौज शुरू हो गई और साथ आए लोगों के मोबाइल भी अपने कब्जे में ले लिए गए। करीब दो घंटे तक दोनों पक्षों के बीच कहासुनी चलती रही, जो बाद में हाथापायी तक पहुंच गई। परिजन का आरोप है कि इसी दौरान गोरखपुर और अंबेडकरनगर की एसओजी टीमें भी आमने-सामने आ गईं। यह भी आरोप है कि विवाद के दौरान अंबेडकरनगर एसओजी के एक सदस्य ने गोरखपुर पुलिस टीम पर पिस्टल तान दी। मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद दोनों जिलों के अधिकारियों के हस्तक्षेप से स्थिति सामान्य हुई। इसके बाद अंबेडकरनगर पुलिस श्रवण को स्थानीय थाने ले गई। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद गोरखपुर पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर लौट आई।
वारदात के बाद से सहमा परिवार
श्रवण कुमार के सकुशल घर लौटने के बाद भी परिवार दहशत से उबर नहीं पाया है। पत्नी दीपशिखा ने बताया कि फोन पर रुपये की मांग और उसके बाद की घटनाओं ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। मां लालमती, बेटी वैष्णवी, भाई संदीप और शनि अब भी भय के माहौल में हैं। दीपशिखा का कहना है कि पति की सलामती के लिए खेत और जेवर तक गिरवी रखने पड़े। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।