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मृतकों के परिजनों की उम्मीदें जगीं: 60 से अधिक कर्मचारियों-शिक्षकों के परिजनों को मिल सकती है राहत

Wed, 02 Jun 2021 02:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

पहले चुनाव ड्यूटी के दौरान तीन कर्मचारियों की ही मौत मान रहा था प्रशासन, फैसले से मृतकों के परिजनों की उम्मीदें जगीं।
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पंचायत चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान मौत पर मुआवजे आदि की मांग कर रहे 60 से अधिक पीड़ित परिवारों को जल्द ही बड़ी राहत मिल सकती है। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस मसले पर कैबिनेट के हुए फैसले के बाद इन सभी परिवारों की उम्मीद एक बार फिर न केवल जग गई है बल्कि अब वे आश्वस्त भी दिख रहे हैं। उधर, जिला प्रशासन का कहना है कि शासन की तरफ से अभी गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। आते ही मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

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सहायक निर्वाचन अधिकारी जगनारायण मौर्य के मुताबिक जिले में पंचायत चुनाव के दौरान मौत के मामले में करीब 62 आवेदन आए हैं जबकि डीडीओ पीएन यादव के अनुसार 45 आवेदन आए हैं। उनका कहना है कि किसी भी आवेदन को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। नया शासनादेश जारी होने के बाद फिर से आवेदन मांगे जाएंगे ताकि कोई पीड़ित मदद पाने से छूट न जाए।

पूर्व में शासन की तरफ से जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक आवेदन भले ही अधिक आए मगर प्रशासन उनमें से तीन की ही मौत, ड्यूटी के दौरान मान रहा था। इनमें एक बेसिक शिक्षा विभाग की सहायक अध्यापिका, एक लोनिवि का मेठ और एक होमगार्ड शामिल है। होमगार्ड की मौत ड्यूटी पर जाते वक्त दुर्घटना में हुई थी जबकि बाकी दो की ब्लॉक से बूथ के लिए पोलिंग पार्टियों की रवानगी के समय। तीनों को 15-15 लाख रुपये के मुआवजे के लिए शासन को संस्तुति भी की जा चुकी है।
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शासन की तरफ से पूर्व में जारी गाइडलाइन के मुताबिक घर से ड्यूटी स्थल और वहां से वापस घर पहुंचने के दौरान जिनकी मृत्यु हुई, सिर्फ उन्हें ही चुनावी ड्यूटी के दौरान मृत माना जाएगा। हालांकि अब कैबिनेट ने यह फैसला किया है कि चुनाव के 30 दिन के भीतर जो कर्मचारी मरे उन सभी के परिजनों को सरकार मदद देगी। बता दें कि जो आवेदन आए है उनमें से ज्यादातर की मौत कोरोना से बताई गई है। परिजनों का दावा है कि पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान ही ये लोग कोरोना संक्रमित हुए और बाद में इलाज आदि के दौरान उनकी मौत हो गई। इनमें ज्यादातर शिक्षा विभाग के हैं। सर्वाधिक विरोध भी शिक्षा विभाग के संगठन ही दर्ज करा रहे थे।

 

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अधिकारियों ने क्या कहा?

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रुपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कर्मचारियों, शिक्षकों का विरोध रंग लाया और सरकार अब चुनाव से 30 दिन के भीतर मरे सभी लोगों के परिजनों को मुआवजा व अन्य सुविधाएं देने के लिए तैयार हो गई है। परिजनों को 30 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का सरकार का फैसला साहसिक और सराहनीय है। सरकार इसके लिए बधाई की पात्र है। मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता के साथ ही उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी भी दी जाए।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मंत्री अश्विनी श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार का फैसला सराहनीय है। पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद के साथ ही सरकार, नौकरी भी दे। कर्मचारी, सरकार के लिए काम करता है। ऐसे में सरकार का भी दायित्व है कि वह उनकी मांगों और परेशानियों पर गौर करे और उसका समय से निस्तारण करे। कर्मचारियों की लंबित मांगों महंगाई भत्ते की तीन किस्त, निलंबित भत्तों की बहाली, दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस इलाज की सुविधा देने आदि को पूरी की जाए।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष  राजेश धर दुबे ने कहा चुनाव ड्यूटी में कोरोना से जान गंवाने वाले शिक्षकों को 30 लाख रुपये देने की सरकार की घोषणा स्वागत योग्य है। कम से कम सरकार ने माना तो चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होकर पूरे प्रदेश में मृत शिक्षकों की संख्या तीन नहीं बल्कि 1621 है। हमारी मांग है कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश का अनुपालन करते हुए यह धनराशि एक करोड़ की जाए। चुनाव ड्यूटी के 30 दिन बाद के प्रतिबंध को और भी स्पष्ट व शिथिल किया जाना चाहिए, क्योंकि संक्रमण से मृत्यु व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करती है।
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