राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रुपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कर्मचारियों, शिक्षकों का विरोध रंग लाया और सरकार अब चुनाव से 30 दिन के भीतर मरे सभी लोगों के परिजनों को मुआवजा व अन्य सुविधाएं देने के लिए तैयार हो गई है। परिजनों को 30 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का सरकार का फैसला साहसिक और सराहनीय है। सरकार इसके लिए बधाई की पात्र है। मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता के साथ ही उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी भी दी जाए।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मंत्री अश्विनी श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार का फैसला सराहनीय है। पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद के साथ ही सरकार, नौकरी भी दे। कर्मचारी, सरकार के लिए काम करता है। ऐसे में सरकार का भी दायित्व है कि वह उनकी मांगों और परेशानियों पर गौर करे और उसका समय से निस्तारण करे। कर्मचारियों की लंबित मांगों महंगाई भत्ते की तीन किस्त, निलंबित भत्तों की बहाली, दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस इलाज की सुविधा देने आदि को पूरी की जाए।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजेश धर दुबे ने कहा चुनाव ड्यूटी में कोरोना से जान गंवाने वाले शिक्षकों को 30 लाख रुपये देने की सरकार की घोषणा स्वागत योग्य है। कम से कम सरकार ने माना तो चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होकर पूरे प्रदेश में मृत शिक्षकों की संख्या तीन नहीं बल्कि 1621 है। हमारी मांग है कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश का अनुपालन करते हुए यह धनराशि एक करोड़ की जाए। चुनाव ड्यूटी के 30 दिन बाद के प्रतिबंध को और भी स्पष्ट व शिथिल किया जाना चाहिए, क्योंकि संक्रमण से मृत्यु व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करती है।