गोड़धोईया नाले के पूरे प्रोजेक्ट की लागत पहले 989 करोड़ रुपये थी। सीवर लाइन के प्रस्ताव को शामिल करने के बाद अब प्रोजेक्ट करीब 1700 करोड़ का हो जाएगा। दरअसल, पहले से तय प्रोजेक्ट में 13 किलोमीटर लंबे गोड़धोइया नाले को पक्का बनाया जाना। इसकी चौड़ाई 20 मीटर करना। नाले के दोनों ओर 10-10 मीटर चौड़ी सड़क और 21 पुलिया बनाया जाना शामिल है। इसके अलावा दोनों तरफ करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर पेड़-पौधे लगाए जाने हैं। अधिकारियों ने बताया कि सीएम का मानना है कि मोहल्लों का पानी नाले में बिना ट्रीट किए गिराया गया तो इसे नौकायन के साथ अन्य सुविधाओं से युक्त करना मुमकिन नहीं होगा।
बनाना होगा 32 एमएलडी का एसटीपी
दर्जन भर से अधिक मोहल्लों से निकलने वाले कचरे की सफाई के लिए 32 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) का एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाना होगा। नाले में पानी ट्रीट कर गिराया जाएगा, तभी इसे रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित किया जा सकेगा। प्रशासन की तैयारी नाले में नाव चलाने की भी है।
नाले व उसके दोनों तरफ सड़क निर्माण पर 350 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जमीन अधिग्रहण और उसके मुआवजे पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पिछले दिनों हुई बैठक में शासन ने 400 करोड़ रुपये देने का आश्वासन दिया था, बाकी धनराशि की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर करने का निर्देश था।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के समक्ष गोड़धोइया नाले के संबंध में प्रजेंटेशन दिया गया है। प्रस्ताव में सीवर लाइन का काम भी जोड़ा जाएगा। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट जलनिगम को बनाना है। इससे शहर की 2.2 लाख से अधिक आबादी लाभान्वित होगी। साथ बड़े इलाके को जलभराव से काफी हद तक छुटकारा भी मिल जाएगा।