अभिभावकों से छुपकर खेल में लगाते हैं पैसा
जिला अस्पताल के डॉ अमित शाही ने बताया कि कुछ वीडियो गेम्स निशुल्क होते हैं, लेकिन कुछ प्रीमियम फीचर होते हैं। इसमें धनराशि चुकाने के बाद ही आगे खेल सकते हैं। बेहतर खेलने के लिए और ऑनलाइन जुड़े गेमर्स को हराने के लिए स्टेज, हथियार, ताकत और हीरो को अनलॉक करने के लिए धनराशि चुकानी पड़ती है। बच्चे इस जीत को हासिल करने के लिए अभिभावकों से छुपकर पैसा खेल में लगाते हैं। ऐसे मामले भी सामने आए हैं।
ऐसे छुड़ाएं लत
- गेम की आदत छुड़ाने के लिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के साथ समय ज्यादा बिताएं। उनके साथ खेलें।
- माता-पिता खुद भी मोबाइल फोन पर ज्यादा समय ना बीताएं।
- छोटे बच्चों को मोबाइल ना दें।
- अगर ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल दे रहे हैं तो उसमें यूपीआई या बैंक की एप आदि न रखें।
- पढ़ाई के लिए अलग से मोबाइल दे सकते हैं, जिसमें अतिरिक्त एप ना हो।
- बच्चों को आपके यूपीआई, बैंक एप के अनलॉक पिन और ट्रांजेक्शन पिन से भी अनजान रखें।
- समय बीताने के लिए जब गेम खेलने की इच्छा हो तो मोबाइल छोड़कर टहलें, व्यायाम कराएं।
- इस लत को पेंटिंग के जरिए आसानी से छुड़वाया जा सकता है। पेंटिंग में बच्चे ज्यादा समय बीताएं, ऐसी व्यवस्था करें।
केस- एक
सूरजकुंड का 13 वर्षीय बालक मोबाइल फोन पर बैटल गेम खेलता था। परिजनों मना कर रहे थे, लेकिन अनसुना कर रहा था। कुछ दिन बाद ऐसी स्थिति हो गई कि गेम खेलने से मना करते ही बालक मारपीट पर उतारू होने लगा। 17 साल की बहन के साथ ही माता-पिता से भी बदजुबानी करने लगा। परिजन मनोचिकित्सक के पास ले गए, जहां पर बच्चे की काउंसिलिंग जारी है।
केस- दो
राप्ती नगर फेज चार के 14 वर्षीय बालक को मोबाइल गेमिंग की ऐसी लत लगी कि खाना-पीना छोड़ दिया। परिजन मना करते तो बगावती तेवर अपना लेता। खुद को पूरे दिन कमरे में बंद रखता। गाली-गलौज और मारपीट कर लेता था। अब जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक की देखरेख में इलाज चल रहा है।