मनरेगा योजना के तहत काम करते लोग। (फाइल फोटो)
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गोरखपुर शहर के साथ ही साथ अब गांवों में भी कोरोना संक्रमण के पैर पसारने की वजह से मनरेगा का काम भी तकरीबन ठप पड़ गया है। जिले की 1294 पंचायतों में रोजाना महज पांच से छह हजार मानव दिवस ही सृजित हो पा रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा 40 हजार मानव दिवस के पार होता है।
पिछले साल के लॉकडाउन में मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रवासी मजदूरों को राहत देने के लिए रोजाना एक लाख कार्य दिवस तक सृजित किए गए थे। हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनाव की वजह से भी दो महीने से अधिकारी इस योजना की तरफ बहुत ध्यान नहीं दे पा रहे थे।
एक बार फिर शासन स्तर पर प्रवासी मजदूरों की घर वापसी को लेकर मनरेगा जॉब कार्ड के नवीनीकरण, नए जॉब कार्ड बनाने और संशोधन करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रवासी श्रमिकों के रोजगार के लिए फिर से योजनाएं तैयार करने को भी कहा गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर तालाब, पीएम आवास योजना और चकरोड बनाने के काम चल रहे हैं, मगर संक्रमण के भय से ज्यादा लोग काम नहीं करना चाह रहे।
सीडीओ इंद्रजीत सिंह ने डीसी मनरेगा, डीपीआरओ व अन्य अधिकारियों को योजना बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रवासियों को गांव में ही रोजगार दिया जा सके। जिन लोगों के पास मनरेगा जॉब कार्ड है, उनको काम मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं।