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Exclusive: भाजपा ने साधा सामाजिक-धार्मिक समीकरण, निर्वाचन जिपं अध्यक्ष का लेकिन निशाना विधानसभा चुनाव

Tue, 29 Jun 2021 01:58 PM IST
vivek shukla संतोष सिंह, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के 10 जिलों में समाज के अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व किया है। 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा ने जातीय व सामाजिक समीकरण साधा है। गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के 10 जिलों में समाज के अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व किया है। संदेश देने का प्रयास किया है कि भाजपा में सबका सम्मान है। इन जिलों में विधान सभी की 62 सीटें हैं।
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मिशन- 2022 से पहले जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव को सेमीफाइल माना जा रहा है। लिहाजा, भाजपा व सपा ने पूरी ताकत लगा रखी है। गोरखपुर क्षेत्र में जिला पंचायत अध्यक्ष की 10 सीटें हैं। गोरखपुर व मऊ में भाजपा प्रत्याशी के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया है।

आठ सीटों पर भाजपा व सपा के बीच सीधा मुकाबला है। मंगलवार यानी आज नाम वापस लेने की औपचारिकता पूरी होगी। अगर किसी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया तो तीन जुलाई को सभी सीटों के लिए चुनाव होंगे। तीन जुलाई को ही नतीजे आ जाएंगे। भाजपा का प्रयास ज्यादा से ज्यादा सीट जीतना है। 
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निषादों को भी साधा

पार्टी नेतृत्व का कहना है कि इस जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। वह आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में मनोयोग से जुटेंगे। जनता में भी संदेश जाएगा कि भाजपा का मुकाबला किसी राजनीतिक दल से नहीं है। गोरखपुर क्षेत्र (भाजपा संगठन) में विधानसभा की 62 सीटें हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले ही 44 सीटें जीती थीं। दो सीटें सहयोगी दलों को मिली थीं।

आगामी विधानसभा चुनाव में निषादों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। लिहाजा, भाजपा ने निषादों को भी साधा है। पार्टी ने आजमगढ़ से संजय निषाद को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया है। भाजपा के थिंक टैंक का कहना है कि गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल में निषाद मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। गोरखपुर में ही करीब पांच लाख मतदाता हैं। यही हालात कुशीनगर, महराजगंज, देवरिया, संतकबीरनगर और बस्ती जिले में भी है। 

भाजपा का दावा 10 में आठ जीतेंगे, दो पर कड़ा मुकाबला
भाजपा के क्षेत्रीय नेतृत्व का दावा है कि गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव तीन जुलाई को होना है। तीन मंडलों में दस जिले हैं। दो जिलों में अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध हो चुका है। अब आठ जिलों में चुनाव होने हैं। जो समीकरण बने हैं, उसके मुताबिक छह सीटों पर भाजपा की जीत पक्की है। दो सीटें ऐसी हैं, जहां मुकाबला कड़ा है। भाजपा सीट निकालने की कोशिश में जुटी है। चुनावी समीकरण दुरुस्त किए जा रहे हैं। 

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी

जिला            भाजपा प्रत्याशी                   सपा प्रत्याशी
गोरखपुर        साधना सिंह (निर्विरोध)         आलोक गुप्ता ने मैदान छोड़ा तो जितेंद्र यादव
कुशीनगर       सावित्री देवी                       रीता यादव
महराजगंज      रविकांत पटेल                  दुर्गा यादव
देवरिया           गिरीश तिवारी                  शैलजा यादव
संतकबीरनगर   कृष्ण कुमार चौरसिया       बलिराम यादव
सिद्धार्थनगर      शीतल सिंह                     पूजा यादव
मऊ                 मनोज राय (निर्विरोध)       राम नगीना यादव
आजमगढ़         संजय निषाद                   विजय यादव
बस्ती               संजय चौधरी                    विरेंद्र चौधरी
बलिया            सुप्रिया चौधरी                    आनंद चौधरी
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भाजपा ने दो सीटें निर्विरोध जीतीं

गोरखपुर और मऊ में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव भाजपा ने निर्विरोध जीत लिया है। गोरखपुर से प्रत्याशी साधना सिंह और मऊ से प्रत्याशी मनोज राय को निर्विरोध निर्वाचन का प्रमाण आज मिल जाएगा। 

भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि सपा का समाजवाद सिर्फ परिवारवाद व एक जाति तक सिमटा है। गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल में जिला पंचायत अध्यक्ष की दस सीटें हैं। सपा ने एक भी सवर्ण प्रत्याशी नहीं बनाया है। आठ जिलों के प्रत्याशी जाति विशेष के हैं। भाजपा ने समाज के हर तबके को प्रतिनिधित्व दिया है। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा को बड़े अंतर से जीत मिलेगी, जो आगामी विधानसभा चुनाव की राह आसान बनाएगी।

समाजवादी पार्टी के निर्वतमान जिला अध्यक्ष राम नगीना साहनी ने बताया कि शासन सत्ता का दबाव है। सब चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। मजबूत दावेदारों को ही चुनाव मैदान में उतारा गया है। सपा में हर वर्ग का सम्मान है। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में हर वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया गया था। ज्यादातर चुनाव जीतकर आए हैं। गोरखपुर में आलोक गुप्ता को प्रत्याशी बनाया गया था। जब आलोक नहीं आए तब जाकर जितेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया गया था।  
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