कम पूंजी में स्थापित कर सकते हैं कृषि आधारित उद्योग : शिक्षामंत्री
गोरखपुर। बेरोजगारी के तात्कालिक और अल्पकालिक विकल्प के रूप में सबसे प्रमुख साधन कृषि है। कृषि आधारित उद्योगों को कम पूंजी में स्थापित कर सकते हैं। ये बातें शहीद बंधु सिंह डिग्री कॉलेज करमहा में आयोजित ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि बेसिक शिक्षामंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कही।
बेसिक शिक्षामंत्री ने कहा कि प्रदेश में रोजगार सृजन की व्यापक संभावनाएं हैं। हम बाढ़ का प्रबंधन करके मत्स्य पालन और बिजली उत्पादन की दिशा में बेहतर काम कर सकते हैं। मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जगदीश सिंह ने फूलों की खेती को बढ़ावा देने तथा माइक्रो लेवल पर फसल संयोजन को प्रोत्साहन देने की बात कही। अध्यक्षता कर रहे आचार्य नरेेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि वापस आए मजदूरों में आठ हजार मजदूरों को डेयरी, मधुमक्खी, मछली पालन आदि का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। अतिथियों का आभार ज्ञापन प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो. जेपी शाही ने तथा संचालन प्राचार्य डॉ. यूपी सिंह ने किया। संगोष्ठी में प्रो. राजवंत राव, प्रो. गोपाल प्रसाद, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. प्रदीप राव, डॉ. निलांबुज सिंह, डॉ. अखिलेश तिवारी, डॉ. गोविंद शरण सिंह, डॉ. सर्वेश दूबे आदि शामिल रहे।
पूर्वी यूपी में मक्के की खेती की अपार संभावनाएं
दूसरे विशेष सत्र के मुख्य अतिथि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेज रिसर्च लुधियाना, पंजाब के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में मक्के की खेती से कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। यहां की भूमि उर्वर है जो मक्के की खेती के लिहाज से बेहद अनुकूल है। डॉ. रक्षित ने कहा कि मक्के से 40 प्रतिशत तक पोल्ट्री उत्पाद बनाए जाते हैं। 14 प्रतिशत तक स्टार्च का उत्पादन मक्के से किया जाता है। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यूएस गौतम, लोक सेवा आयोग के सदस्य डॉ. हरेश प्रताप सिंह ने भी अपने विचार रखे।