गोरखपुर जिले के भटहट निवासी जुबैर पिछले 20 सालों से दिल्ली में परिवार के साथ रहकर एक फैक्ट्री में काम करते हैं। इस बीच कभी-कभी ही घर आना होता था। मगर, लॉकडाउन में एक महीने तक फैक्ट्री का ताला नहीं खुला तो अपने गांव लौट आए।
यहीं पर एक छोटा सा आशियाना बनाने के साथ खेती शुरू करने का इरादा बनाया। मगर, जानकारी के मुताबिक मौके पर जमीन कम हो गई है। पैमाइश के लिए अब वह थाने से लेकर तहसील तक चक्कर लगा रहे हैं।
दो साल बाद हरियाणा से लौटे विनोद निषाद की बहरामपुर की तीन डिसमिल जमीन पर कब्जा हो गया है। उनका कहना है कि अगल-बगल के लोगों ने बढ़कर घर बनवा लिया। मौके पर अब सवा दो डिसमिल जमीन ही रह गई है। मंगलवार को वह प्रार्थनापत्र हाथ में लिए लेखपाल को खोज रहे थे।
फिर से बाहर नहीं जाने की सोच रहे हैं लोग
जुबैर या विनोद तो बानगी हैं। रोटी के संकट में लॉकडाउन के दौरान 50 हजार से अधिक लोग दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात आदि प्रांतों से अपने गांव लौटे हैं। कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के बीच लंबे समय तक वापसी की उम्मीद कम नजर आई तो अब यहीं पर काम धंधा करने की सोच रहे हैं।
कोई गांव में ही टूट चुके घर की मरम्मत कराना चाहता है, तो कोई बंटवारा कर नया घर बनाने की जुगत में जुटा है। कुछ यहीं पर रहकर अब खेती का मन बना चुके हैं। इस कवायद में जब जमीन की तरफ संबंधित प्रवासी कामगारों का ध्यान जा रहा तो पता चल रहा कि किसी की जमीन पर कब्जा हो गया तो किसी की जमीन ही नहीं मिल रही।
तमाम पंचायतों में जमीन के विवाद बढ़ गए हैं। लॉकडाउन के बीच भी थानों और तहसीलों में इन्हीं विवादों से जुड़े प्रार्थनापत्र आ रहे हैं। कोई जमीन की पैमाइश चाहता है तो कोई बंटवारा। जिला प्रशासन भी यह मान रहा है कि कोरोना का संकट खत्म होते ही जमीन संबंधी विवाद और बढ़ जाएंगे।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगवरवाल ने कहा कि बंटवारे, पैमाइश और जमीन कब्जा होने से जुड़े कई शिकायतें मिल रही हैं। सभी नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपालों को कोरोना संकट से बचाव आदि के कामों को पूरी प्राथमिकता देने के साथ ही अभियान चलाकर राजस्व संबंधी मामलों के भी निस्तारण का निर्देश दिया गया है। पहल अभियान भी फिर से शुरू होगा। जिसके तहत टीम गांव में पहुंचकर विवाद सुलझाने के साथ ही साथ सरकारी जमीनों को कब्जे से मुक्त कराएगी।