गोरखपुर जिले के गगहा ब्लाक के एक गांव के युवा गुजरात के बड़ोदरा शहर में एक फैक्ट्री में काम करता था। कोरोना महामारी के बीच जब प्रदेश सरकार ने अपने लोगों को बुलाने का फैसला किया तो इन युवाओं ने भी वहां के कलेक्ट्रेट ऑफिस में गोरखपुर आने के लिए आवेदन किया।
आवेदन के साथ ही इनसे 700 रुपये टिकट के लिए लिया गया। ठीक दूसरे दिन इन्हें सूचना दी गई कि उनके जाने की तिथि निर्धारित हो गई है। तय समय के अनुसार युवक को बस से रेलवे स्टेशन लाया गया और पुलिस के कड़े पहरे में उसे ट्रेन पर बैठाया गया।
उसी दौरान उन्हें टिकट भी दिया गया, बड़ोदरा से 1200 सौ लोगों को लेकर ट्रेन इलाहाबाद पहुंची। यहां से अलग-अलग शहर के लोगों को बस से उनके घर छोड़ा गया। गोरखपुर से ही युवक को दूसरी बस में बैठाकर हाटा बाजार उतारा गया।
वहीं गोरखपुर में कोरोना लक्षण दिखने पर ही लोगों को क्वारंटीन कराया जा रहा है, नहीं तो उन्हें घर भेज दिया जा रहा है। वहीं युवक का भी जांच में कोरोना का कोई लक्षण नजर नहीं आया। लेकिन युवक घर जाने की बजाय गांव के प्राथमिक विद्यालय पर क्वारंटीन होने पहुंच गया। युवक ने बताया कि बड़ोदरा से चलने से पहले उनकी मेडिकल जांच की गई, उसके बाद उन्हें आने की इजाजत मिली।
उसने बताया कि मेरा घर इतना बड़ा नहीं है कि उसमें मैं अलग से क्वारंटीन हो सकूं, ऐसे में मैंनें यहां प्राथमिक विद्यालय में बने क्वारंटीन में रहूंगा। वहीं ग्राम प्रधान ने भी उसकी मजबूरी को समझते हुए उसके रहने की उचित व्यवस्था की है।