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UP News: हिंदी संस्थान के पुरस्कार से चमकी गोरखपुर के साहित्य की मेधा, चार साहित्यकारों व लेखकों के नाम शामिल

Wed, 03 Aug 2022 02:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

इतिहासकार और डीएवी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. कृष्ण कुमार पांडेय की पुस्तक पूर्वांचल में स्वाधीनता संघर्ष को ईश्वरीय प्रसाद पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। इन तीनों लेखकों को हिंदी संस्थान की ओर से 75-75 हजार रुपये की धनराशि दी जाएगी।
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Gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने मंगलवार को वर्ष 2021 के पुरस्कारों की घोषणा कर दी। पुरस्कारों की सूची में गोरखपुर के चार साहित्यकारों व लेखकों के नाम शामिल हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. प्रत्यूष दुबे को मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय स्तरीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें पुरस्कार के तौर पर एक लाख रुपये दिए जाएंगे।

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पुरस्कारों की सूची में तीन लेखकों के नाम हैं, जिनकी पुस्तकों को पुरस्कृत करने के लिए नामित किया गया है। बृजभूषण राय ‘बृज’ की पुस्तक गोविंद-गीत को सुब्रमण्यम स्वामी पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। उनकी पुस्तक गोरी सोए सेज पर को पिछले वर्ष हिंदी संस्थान का पुरस्कार मिला था। इसी प्रकार महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित रामजनम सिंह की धर्म-दर्शन पर आधारित पुस्तक ‘मानस की प्रासंगिकता को नंदकिशोर देवराज पुरस्कार के लिए चुना गया है।

इतिहासकार और डीएवी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. कृष्ण कुमार पांडेय की पुस्तक पूर्वांचल में स्वाधीनता संघर्ष को ईश्वरीय प्रसाद पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। इन तीनों लेखकों को हिंदी संस्थान की ओर से 75-75 हजार रुपये की धनराशि दी जाएगी। पुरस्कार घोषित होने की सूचना के साथ ही गोरखपुर के साहित्यकारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
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कोई भी सम्मान मिलने पर सुख की अनुभूति तो होती है, साथ ही जिम्मेदारी का बोध भी होता है। एक शिक्षक के रूप में अब तक जिस जिम्मेदारी का निवर्हन कर रहा था, पुरस्कार प्राप्ति के पश्चात और उत्साह से करूंगा। ताकि अपने पेशे, भाषा व क्षेत्र के साथ न्याय कर सकूं और मान बढ़ा सकूं। मैं गोरखपुर वासियों और पुरस्कार समिति के प्रति आभार प्रकट करता हूं।- प्रो. प्रत्यूष दुबे, आचार्य दीदउ गोरखपुर विश्वविद्यालय।

अभी तक पुरस्कार के लिए मेरी पुस्तक ‘मानस की प्रासंगिकता’ के चयन की जानकारी नहीं थी। आपके माध्यम से सूचना मिली है। बहुत खुशी हुई। मुझे उम्मीद थी कि अगर इस पुस्तक को पढ़ा जाए तो पुरस्कार के लिए जरूर चयनित होगी। यह मेरी दूसरी पुस्तक है। इसे कोरोना काल में महज 69 दिनों में लिखा है। इसे लिखने में बहुत साधना की थी। रामायण से पुस्तक लिखने की प्रेरणा मिली है। इसमें त्याग, पारिस्थितिकी संतुलन, संतों के विषय को उठाया है। - रामजनम सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य एमपी इंटर कॉलेज।

सच कहूं तो पूर्वांचल में स्वाधीनता संघर्ष पुस्तक लिखने के लिए मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा है। इसके लिए तथ्यों को जुटाना आसान नहीं था। पुस्तक के पुरस्कृत होने से मुझे इस दिशा में और कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। पुस्तक के पुरस्कृत होने की सूचना से बहुत खुशी हुई है। इस पुरस्कार को मैं पूर्वांचल के स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित करना चाहूंगा।- डा. कृष्ण कुमार पांडेय, पूर्व प्राचार्य, डीएवी पीजी कॉलेज।

मेरी पुस्तक को हिंदी संस्थान के पुरस्कारों की सूची में लगातार दूसरी बार स्थान मिला है, यह मेरे लिए हर्ष की बात है। पुस्तक गोविंद गीत, जयदेव के गीत गोविंदम पुस्तक का बृज भाषा में भावानुवाद है। पुरस्कृत होने से पुस्तक की सफलता पर मुहर लग गई है। पुरस्कार निश्चित रूप से आगे और बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं। - बृज भूषण राय बृज, कवि।
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