कासिम सुलेमानी इंसनियत के पैरोकार थे। उन्होंने अपनी जिंदगी इंसानियत की हिफाजत और आतंकवाद के खिलाफ आंदोलन करने का काम किया। उन्होंने पाकिस्तान में फंसे कुलदीप जाधव की रिहाई के लिए जंग लड़ी। इसी तरह के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई बार इंसानियत के लिए भेदभाव किए बिना आंदोलनकारी कार्य किया।
कासिम सुलेमानी के तेज तर्रार प्रवृत्ति से अमेरिका को डर लग रहा था। यह बात डुमरियागंज क्षेत्र के शिया बहुल गांव हल्लौर स्थित इमामबारगाह शाहआलमगीर सानी में रविवार की रात कासिम सुलेमानी के फातेहा की मजलिस को खिताब करते हुए जाकिर-ए-अहलेबैत जमाल हैदर ने कही।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी फौज ने कासिम सुलेमानी के साथ वही किया है, जो यजीद ने इमाम हुसैन के साथ किया था। तीन जनवरी की रात इस्लाम और इंसानियत के विरोधी हैवानों के नापाक इरादों की वजह से कासिम सुलेमानी शहीद हो गए जो कि ईरान के सेना के कमांडर थे।
कर्बला के शहीद कासिम को भी किया याद
मजलिस के अंत में कर्बला के शहीद इमाम हसन के बेटे जनाबे कासिम के बारे में बयां किया जिसे सुनकर उपस्थित लोगों के आखों से आंसू बहने लगे। मजलिस की शुरुआत शहीद आलम और उनके साथियों ने मर्सिया से की। इस दौरान बेताब हल्लौरी, डॉॅ. नायाब हैदर, सोमन मास्टर, जफरुल हसन, हबीबुल, अकील अहमद, तसबीब हसन आदि मौजूद रहे।